UPPSC में आरक्षण पर विरोध के बाद नए नियम रद्द
लखनऊ। यूपीपीएससी में कोटे के विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षण देने का विवादास्पद निर्णय वापस ले लिया है। सरकार के रिजर्वेशन व्यवस्था में किए बदलाव के बाद छात्रों के बढ़ते आकोश को देखते हुए इसे रद्द कर दिया है।
अखिलेश सरकार ने इस नियम के तहत आरक्षित वर्ग के छात्रों को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के साथ इंटरव्यू में भी आरक्षण दिया गया था। अखिलेश सरकार के इस फैसले के बाद यूपी में छात्रों का बवाल शुरु हो गया था। उनका कहना था कि सरकार एक खास वर्ग के लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रिमो मायावती ने कहा कि इस फैसले से सपा सरकार एक खास वर्ग को फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही थी ताकि वो वोट बैक की राजनीति को और असरदार बना सके।
छात्रों के बवाल और विरोधियों की आलोचना के बाद इलाबाबाद कोर्ट के फैसले से पहले ही अखिलेश यादव ने अपना फैसला जनता को सुनाते हुए इसे रद्द कर दिया है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने इससे पहले आयोग के चेयरमैन अनिल यादव को लखनऊ बुलाया था, जिसके बाद आयोग ने नए आरक्षण नियम को वापस ले लिया।
गैरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रों की अपील पर नई आरक्षण व्यवस्था पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही राज्य में 2011 की परीक्षा के सफल प्रत्याशियों के इंटरव्यू पर भी रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार से जाति आधारित इस नई व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा था।












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