मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए अब नहीं होगा कॉमन ऐंट्रेंस टेस्ट: SC

तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला चीफ जस्टिस अल्तमश कबीर और जस्टिस विक्रमाजीत सेन की सहमति से दिए। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज अपने स्तर पर एंट्रेंस टेस्ट करा सकते है, जबकि राज्य और केंद्र सरकार अपनी प्रवेश परीक्षा अलग से कराएंगे।
सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला उन संस्थानों पर भी लागू होगा जिन्होंने मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए कोई एंट्रेंस टेस्ट नहीं करवाई है। इससे पहले अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एमसीआई और निजी कॉलेजों पुराने दिशानिर्देशों के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू करें।
जहां छात्रों का मानना है कि एनईईटी के जरिए मेडिकल कोर्स में प्रवेश मिलना ज्यादा आसान और निष्पक्ष है। वहीं कोर्ट ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एमसीआई की परीक्षा प्रणाली एनईईटी निजी कॉलेजों पर थोपी नहीं जा सकती।
गौरतलबा है कि कॉमन एंट्रेंस पर ये विवाद उस वक्त उठा जब एमसीआई ने एमबीबीएस, डेंटल और पीजी मेडिकल पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेंस टेस्ट आयोजित करने का फैसला किया। एमसीआई के इस फैसले के खिलाफ निजी कॉलेजों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद आज कोर्ट ने इसे खत्म कर दिया है।












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