अमेरिका में दी जा रही उत्‍तराखंड त्रासदी के मृतकों को श्रद्धांजलि

कैलीफॉर्निया। उत्‍तराखंड में आज से ठीक एक महीने पहले आयी पहाड़ी सुनामी में पांच हजार से ज्‍यादा लोगों की जान चली गई। आज पूरा देश मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। ऐसे में हॉलीवुड और अमेरिका के लोग भी इस श्रद्धांजलि सभा का हिस्‍सा बने हैं। अमेरिका में पैसिफिक ओशियन के तट पर तमाम लोगों ने उत्‍तराखंड में मारे गये लोगों की आत्‍मा की शांति की प्रार्थना की।

अस्थि विसर्जन और आस्था सर्जन की इस घड़ी में पूरा सन्त समाज, समस्त पुरोहित समाज और प्रकारान्तर से पूरा देश एक साथ है। देवभूमि की इस त्रासदी के इन पलों में विश्व के अनेक देशों ने अपनी भावनाओं को उत्तराखण्ड की जनता के साथ, भारतवर्ष के साथ एकाकार किया। सभी ने गहरे तक इस दर्द को अनुभव किया। सबका कहना है कि यह दर्द केवल उत्तराखण्ड का नहीं, केवल भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का दर्द है। जब इधर हरिद्वार में उत्तराखण्ड त्रासदी-2013 में काल-कवलित हुए अपनों का अस्थि विसर्जन विधि विधान से किया जा रहा है, उसी समय संयुक्त राज्य अमेरिका के हॉलीवुड केलीफोर्निया में कई स्थानों पर श्रद्धांजलि के कार्यक्रम श्री स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हो रहे हैं।

उत्तराखण्ड त्रासदी में जिन लोगों ने अपने प्राण उत्सर्ग किए, पीडि़तों की रक्षा और सवेा में भारतीय वायु सेना, थल सनेा, एनडीआरएफ, आईटीबीपी आदि सुरक्षा बलों के जिन सैनिकों ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी, उनकी दिवगंत आत्माओं की शान्ति के लिए विदेश की धरती पर भी प्रार्थना सभायें सम्पन्न हुईं। सामूहिक प्रार्थना की इन सभाओं में इन सभी के परिवारों को शक्ति व सम्बल देने एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की गयी। दुनिया ने भारतीय सेना और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पौरुष, कर्तव्यनिष्ठा एवं मातृभूमि के प्रति समर्पण के भाव को वन्दन किया। गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश द्वारा दिवगंतों की याद में केदारनाथ, गौरीकुण्ड, रामबाड़ा, गौरीबाग आदि स्थानों पर स्मृति वनों की स्थापना की भावी योजना में हाथ बंटाने का सकंल्प हॉलीवुड व अमेरिका के लोगों ने भी लिया।

स्वामी जी का कहना है कि धर्मनगरी हरिद्वार के जिस पुण्यस्थल हर की पैड़ी पर यह विशिष्ट अस्थि विसर्जन हो रहा है, उसके आसपास इनकी याद में स्मृति उपवनों की स्थापना अवश्य की जानी चाहिए, ताकि यहाँ आने वाले लोग इन उपवनों से प्रेरणा लेकर अपनी तीर्थयात्रा की याद में अपने क्षेत्रो में जाकर पौधरोपण करें, उपवनों को विकसित करें। पेड़ बचेंगे तो पहाड़ बचेंगें, पहाड़ बचेंगे तो प्रकृति बचेगी तथा हम हमारी भावी सन्तानों को जीवन दे सकेंगे। जब प्रकृति अपना स्वभाव बदल रही है, तब हम सबको भी अपना स्वभाव बदलना ही चाहिए। हरिद्वार के इस स्थल पर आइए। हम सब एक नई आस्था का सर्जन करें। कुम्भनगरी के खाली स्थानों पर मास्टर प्लान बनाकर स्मृति उपवनों में पौधे रोपकर दिवगंतों को पावन श्रद्धांजलि दें।

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