क्या है नरेंद्र मोदी और कल्याण सिंह में समानता?
[नवीन निगम] गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह में क्या समानता है, तो आपको यह सवाल कुछ अटपटा लगेगा, लेकिन अब यूपी की राजनीति में यह अटपटा सवाल की बहुत बड़ा उत्तर बनने जा रहा है। भाजपा के इन दो दिग्गजों में कई समानताएं हैं। एक समानता यह भी है कि 2002 में जब अटल प्रधानमंत्री थे तब आडवाणी खेमे के यह दो नेता भाजपा के मजबूत सेनापति थे और इस कारण अटल बिहारी वाजपेयी के निशाने पर थे।
मोदी तो मुख्यमंत्री होने के कारण अपना पद और प्रतिष्ठा बचा गए, लेकिन कल्याण सिंह को भाजपा छोडऩी पड़ी थी। दोनों में एक समानता और है दोनों पिछड़े वर्ग से आते हैं और लम्बे समय तक इसी कारण से भाजपा के कई नेताओं से इनके रिश्ते ठीक नहीं रहे। आज मोदी को कल्याण की और कल्याण को मोदी की आवश्यकता हैं। कल्याण को भाजपा में अपनी खो चुकी सियासी जमीन की तलाश है, तो नरेंद्र मोदी को पीएम बनने के लिए यूपी से रास्ते की। दोनों के एक साथ आने से यह दोनों ही बातें पूरी हो सकती हैं।

कुछ लोग मानते है कि कल्याण का असर अब यूपी की राजनीति में नहीं रहा, यह ठीक भी है और मोदी के बारे में ठीक नहीं भी। क्योंकि यहां कल्याण सिंह को मोदी को अपने वोट बैंक से परिचय कराना है। सोचिए जब पशिच्मी उप्र जहां सत्ता में यादवों के वर्चस्व से दुखी अन्य पिछड़ी जातियों को कल्याण सिंह, नरेंद्र मोदी के पक्ष में यह कहते गोलबंद करेंगे कि मोदी पीएम बनते है तो समझ लीजिएगा की कल्याण पीएम बन गए। तो असर तो पड़ेगा और अमित शाह का हर दौरे में कल्याण से अकेले मिलना भी इस ओर संकेत दे रहा हैं।
थोड़े दिनों पहले ही एक साक्षात्कार में कल्याण सिंह ने कहा था कि वह चाहते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से लोकसभा का चुनाव लड़ें क्योंकि ऐसा होने पर भाजपा को बहुत फायदा मिलेगा। कल्याण ने कहा कि वह अपने अनुभव और जानकारी के आधार पर कह सकते हैं कि शहरों की लोकप्रियता से कहीं आगे जाते हुए मोदी के नाम का डंका अब गांव-गांव में बजने लगा है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर के एक ग्रामीण इलाके में लोगों ने भाजपा समर्थकों से साफ कह दिया है कि अगर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना हो तभी वोट मांगने आना।
मोदी लखनऊ से चुनाव लड़ेगे इस बात की पुष्टि भी कल्याण सिंह की एक बात से होती है कि जब उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते है कि मोदी किसी सिंटिग एमपी की सीट से चुनाव लड़े। इसका अर्थ साफ है कि कल्याण नहीं चाहते है कि मोदी लखनऊकी सीट जिसपर लालजी टंडन एमपी है उससे लड़े। क्योंकि उनके दिल में अभी भी वो दर्द छिपा है जिसमें अटल और उनके बीच में मतभेद की एक वजह वह टंडन को भी मानते है तभी कल्याण कहते हैं कि वह यह नहीं कह सकते कि नरेंद्र मोदी भाजपा के किसी सिटिंग लोकसभा सदस्य की सीट से लड़ें, लेकिन कल्याण सिंह ने कहा कि प्रदेश में ग्रामीण पृष्ठभूमि की कई ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां लोग मोदी-मोदी चिल्ला रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा हो चला है कि मोदी आएंगे तो ही देश बचेगा।












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