उत्‍तराखंड में बारिश ने बढ़ाई 20 हजार लोगों की मुसीबतें

देहरादून। उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में रविवार को बादल छाए हुए हैं और मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश की सम्भावना व्यक्त की है। ऐसे में वहां फंसे लगभग 20,000 लोगों को निकाला जाना अनिश्चित-सा लग रहा है। शनिवार को राहत कार्य में लगे अधिकारियों ने कहा कि 20,000 लोग अभी भी बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं। यहां सैंकड़ों लोगों की जान चली गई है।

बचाव कर्मियों का कहना है कि आपदाग्रस्त इस इलाके से हर जीवित व्यक्ति को सुरक्षित निकालने के लिए वे अपनी सर्वोत्तम कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि बारिश में हवाई मार्ग से लोगों को निकालना असम्भव हो सकता है। बचाव कार्य में लगे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "अगर बारिश दोबारा शुरू होती है, तो हमारे हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाएंगे और बचाव कार्य को रोकना पड़ेगा।"

सेना के केंद्रीय कमान के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 25 से 27 जून के बीच भारी बारिश की सम्भावना है, और घने बादलों की वजह से उड़ानें प्रभावित होंगी। राज्य के पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमौली जिलों में भारी बारिश की सम्भावना है, जो पिछले सप्ताह बादल फटने और बारिश की वजह से पहले से आपदा झेल रहे हैं।

सेना ने भी कहा है कि रविवार का दिन, बचाव कार्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। देहरादून और रुद्रप्रयाग में घने बादलों की वजह से शनिवार को कई उड़ानें रोक दी गई हैं। देहरादून में बारिश भी हुई है। एक सैन्य अधिकारी ने बताया चमौली शहर के नजदीक घाटी में घने धुंध छाए हुए हैं, जिससे हवाई यातायात कठिन और पेंचीदा बन गया है। पर्यावरणविदों के मुताबिक, भारी बारिश के बाद सूरज निकलने से छाई धुंध इस पहाड़ी इलाके का सामान्य लक्षण है।

केदारनाथ, जंगलचट्टी और रामबाड़ा में शनिवार को 600 लोग बचाए गए हैं और गुप्तकाशी से 1,800 असहाय तीर्थयात्रियों को 150 वाहनों के जरिए ऋषिकेष भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि 1,000 से अधिक प्रमुख और छोटी सड़कें बारिश में बह गई हैं और इस वजह से सिर्फ हवाई यातायात ही लोगों को बचाने का माध्यम रह गया है। भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के जवान लोगों को बचाने के लिए नए रास्ते बना रहे हैं।

पांडुकेश्वर, घनघरिया और पुलना से 1,550 लोगों को बचाया गया, जबकि बद्रीनाथ में 5,000 से अधिक लोग फंसे हुए हैं। अब तक लगभग 17,000 लोग इस इलाके से सुरक्षित जगहों पर भेजे जा चुके हैं। राज्य में अभी मानसून की बारिश बाकी है, लेकिन पिछले सप्ताह भारी बारिश हुई थी जो इस मौसम में होने वाली बारिश से 450 फीसदी अधिक थी। राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इसे हिमालयी सूनामी की संज्ञा देते हुए कहा कि इस आपदा में हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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