भाजपा की नीतीश को सलाह, साथ छोड़ना है तो गद्दी भी छोड़ें
पटना। बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में बिखराव शनिवार को भाजपा के यह कहने के साथ ही सतह पर आ गया कि यदि नीतीश कुमार ने गठबंधन तोड़ने का फैसला ले ही लिया है तो वे इस्तीफा देकर ताजा जनादेश हासिल करें। भाजपा नेता और मंत्री चंद्रमोहन राय ने मीडिया से कहा कि बिहार में 2010 में जनादेश जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) और भाजपा को संयुक्त रूप से शासन करने के लिए मिला था।
नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें, क्योंकि राज्य की जनता ने 2010 में राजग को जनादेश दिया था।
एक अन्य भाजपा नेता और सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने भी इसी प्रकार की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन टूटता है तो नीतीश कुमार इस्तीफा दें और ताजा जनादेश हासिल करें। भाजपा नेताओं की यह मांग बिहार में गठबंधन में बढ़ते तनाव के कारण उठी है। नीतीश कुमार के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी के रूप में पेश किए जाने पर आपत्ति के कारण गठबंधन में तनाव पैदा हुआ।

अभी हाल तक सुशील कुमार मोदी न केवल नीतीश कुमार के करीबी माने जाते रहे हैं, बल्कि वे जदयू के साथ साझेदारी के पुरजोर समर्थक भी रहे हैं। उन्होंने अब अपना रवैया बदल लिया है। बिहार सरकार में भाजपा कोटे के मंत्री पिछले दो दिनों से कार्यालय जाना बंद कर रखा है। जदयू नेता और राज्य के शिक्षा मंत्री पीके शाही ने कहा कि भाजपा को नरेंद्र मोदी पर अपना रुख साफ करना चाहिए। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद शाही ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जदयू के लिए गठबंधन का हिस्सा बने रहना संभव नहीं है।
नीतीश कुमार ने गुरुवार को बिहार में राजनीतिक स्थिति 'कठिन' बताया था। अब सभी की निगाहें जदयू अध्यक्ष शरद यादव पर टिकी हैं। वे शनिवार रात यहां पहुंचेंगे और नीतीश कुमार एवं पार्टी के अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे। जदयू के एक अन्य नेता ने आईएएनएस से कहा कि पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया है और इस संबंध में रविवार को घोषणा की जाएगी। (आईएएनएस)












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