आकाशवाणी लखनऊ ने पूरे किये 75 वर्ष
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा मार्ग पर स्थित आकाशवाणी भवन, लखनऊ की नींव वर्ष 1938 में रखी गई थी। आकाशवाणी ने अपने प्रसारण के गौरवशाली 75 वर्ष इसी वर्ष पूरे किए हैं। इन 75 वर्षो में कई नामी-गिरामी कलाकारों ने इस आकाशवाणी केंद्र के माध्यम से संगीत और साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
आकाशवाणी लखनऊ के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संस्थान की तरफ से 'अवधवाणी' नाम से एक पत्रिका प्रकाशित की गई है। यूं तो यह पत्रिका का 17वां अंक है लेकिन इसके माध्यम से लखनऊ आकाशवाणी ने अपने गौरवशाली इतिहास को आम लोगों के बीच पहुंचाने का प्रयास किया है।

आकाशवाणी का यह वही संस्थान है जहां से रमई काका (चंद्रभूषण द्विवेदी और बताशा बुआ (सुमित्रा कुमारी सिन्हा) लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने में कामयाब रहे। इन दोनों शख्सियतों ने आकाशवाणी के माध्यम से अवधी बोली को एक नया आयाम दिया।
आकाशवाणी लखनऊ केंद्र के अपर महानिदेशक गुलाब चंद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आकाशवाणी लखनऊ इस वर्ष अपने गौरवशाली इतिहास के 75 वर्ष पूरे कर रहा है। इस मौके पर 'अवधवाणी' का 17वां अंक प्रस्तुत किया गया है। चंद के मुताबिक, हिंदुस्तानी संगीत के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में आकाशवाणी के इस केंद्र ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संगीत जगत के अधिकांश शीर्ष कलाकार शुरू में इसी केंद्र से जुड़े रहे हैं।
गुलाब चंद ने बताया कि शास्त्रीय संगीत में सिद्धेश्वरी देवी, बेगम अख्तर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, पं. रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान तथा सुगम संगीत में तलत महमूद, मदन मोहन, जयदेव और अनूप जलोटा जैसे नामी-गिरामी कलाकारों ने इस केंद्र का नाम रौशन किया है। इनमें से कई कलाकारों ने तो अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत ही आकाशवाणी के इसी केंद्र से की है।
चंद ने कहा कि लोकगीतों की बात करें तो रमई काका के नाम से मशहूर चंद्रभूषण द्विवेदी और बताशा बुआ के नाम से मशहूर सुमित्रा कुमारी सिन्हा ने अवधी बोली को एक अलग पहचान दी। आकाशवाणी के इस केंद्र का संगीत के अलावा साहित्य के क्षेत्र में भी अहम योगदान रहा है। गुलाब चंद बताते हैं कि देश के प्रमुख लेखकों और कवियों में शुमार होने वाले कई नामी-गिरामी लोगों ने आकाशवाणी लखनऊ को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया।
चंद ने बताया कि पं श्रीनारायण चतुर्वेदी, अमृतलाल नागर, यशपाल, भगवती चरण वर्मा, कुंवर चंद्र प्रकाश, मजाज लखनवी और के.पी. सक्सेना जैसे लेखक और कवि आकाशवाणी लखनऊ की ही देन कहे जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि आकाशवाणी लखनऊ की स्थापना 2 अप्रैल सन् 1938 को हुई। इसका उद्घाटन यूनाइटेड प्रोविसेंज ऑफ आगरा एंड अवध के तत्कालील गवर्नर सर हेरी हेस ने किया था। बाद में इस संस्थान की तकनीकी क्षमता का और अधिक विस्तार होता गया।












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