आडवाणी vs मोदी का फायदा उठा रहे हैं नीतीश!

पार्टी के कद्दावर नेता नीतीश कुमार तो जैसे टकटकी लगाये बैठे थे कि कैसे वह मोदी की खिलाफत करें। रविवार को नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने अपने लोकसभा चुनाव का प्रभारी बनाया तो अंदर ही अंदर जेडीयू में खलबली मच गयी कि अब भाजपा का साथ वह कैसे निभायें लेकिन कोई मौका ना होने के कारण और हाल ही में उपचुनाव में बुरी तरह से मात गये नीतीश कुमार ने इस मसले पर चुप ही रहना उचित समझा और मौके का इंतजार करने लगे।
जिसे कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने उन्हें बखूबी दे दिया है। अब जेडीयू आडवाणी राग अलाप रही है और साफ-साफ कह रही है कि अगर आडवाणी बीजेपी के चुनावी प्रभारी नहीं बनते हैं तो हम गठबंधन के बारे में सोच सकते हैं। कहा जा रहा है नीतीश कुमार ने इस सिलसिले में मंगलवार देर रात में अपने यहां मीटिंग भी बुलायी थी। नीतीश कुमार अब खुल कर आडवाणी की वकालत कर रहे हैं और मोदी पर निशाना साध रहे हैं।
अगर भाजपा नीतीश कुमार की बात नहीं मानती है तो बिहार में उसका और जेडीयू का पिछले 17 साल से चला आ रहा दोस्ताना टूट जायेगा। जो कि जेडीयू की सेहत पर तो नहीं असर डालेगा , हां भाजपा के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
आपको बता दें कि इस समय बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं। जिसके लिए अगर जो भी सरकार बनाये उसके पास 122 सीटें होनी चाहिए। जो आकंड़े इस समय हैं उसके मुताबिक जेडीयू के पास स्पीकर के अलावा 117 सीटें हैं और बीजेपी की 91 सीटें हैं। आरजेडी की 22, कांग्रेस की चार, सीपीआई और एलजेपी की 1-1 और छह निर्दलीय हैं।
यानी जेडीयू की अपनी 117 सीटों के साथ अगर छह निर्दलीयों को भी जोड़ लिया जाए तो आंकड़ा 123 पहुंच जाता है, यानी जेडीयू को सिर्फ चार निर्दलीय विधायकों की मदद चाहिए। इसलिए नीतीश कुमार आसानी से अपनी बात बीजेपी हाईकमान के सामने रख सकते हैं। देखते हैं आरएसएस ने तो आडवाणी को मना लिया लेकिन नीतीश कुमार के लिए भाजपा क्या कदम उठाती हैं?












Click it and Unblock the Notifications