कम से कम छह महीने के लिए प्रधानमंत्री बनना चाहते थे आडवाणी: रिपार्ट
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बनाये जाने के एक दिन बाद भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण आडवाणी के इस्तीफा देने का कारण क्या वाकई पार्टी के नेताओं का नैतिक पतन है। 'मिड डे' में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार आडवाणी भाजपा में अब भी मुखिया की भूमिका निभाना चाहते थे, ऐसा न होने पर ही उन्होने इस्तीफा देने का फैसला किया।
'मिड डे' में छपी रिपोर्ट के अनुसार आडवाणी ने पार्टी के सामने तीन शर्ते रखी थी। जिसमें एक यह थी कि अगर एनडीए सत्ता में आती है तो पार्टी को दिये गये उनके योगदान के कारण उन्हे कम से कम छह महीने तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने दिया जाय। जिस पर पार्टी के बड़े नेताओं में सहमति नहीं बन पा रही थी। आडवाणी अस्सी वर्ष के होने के बावजूद खुद को पीएम पोस्ट के लिए प्रमुख प्रतियोगी मानते थे।
दूसरी शर्त के अनुसार आडवाणी चाहते थे कि नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन नहीं बल्कि संयोजक बनाया जाय। इसके अलावा अंतिम शर्त के अनुसार आडवाणी का कहना था कि अगर मोदी को पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बनाया भी जाता है तो वह आडवाणी को रिपोर्ट करें। जिस पर अंतिम फैसला आडवाणी ही लेंगे।
इस रिपोर्ट से यह तो साफ है कि वह पार्टी के सर्वेसर्वा बने रहना चाहते थे जिससे कोई भी उनकी बादशाहत को चुनौती न दे सके, लेकिन आरएसएस के समर्थन के कारण्ा मोदी का प्रचार समिति का चेयरमैन बनना तय था। मोदी को आरएसएस का वरदहस्त प्राप्त है। इन हालातों को जानने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपने बेटे पंकज सिंह (उत्तर प्रदेश भाजपा यूनिट के जनरल सेक्रेटरी) को दिल्ली भेजा। रिपोर्ट के अनुसार यहां तक की आडवाणी के लिए एक चार्टर्ड प्लेन भी तैयार रखा गया कि अगर वह मनाने पर गोवा आना चाहते हैं तो उन्हें तुरंत वहां लाया जा सके लेकिन आडवाणी ने पार्टी बैठक से खुद को दूर ही रखा।
इस्तीफा देते हुए आडवाणी ने अपने पत्र में लिखा था कि पार्टी के नेता अब अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए काम कर रहे है, पर सच तो यह है कि वह खुद प्रधानमंत्री के लिए हर संभव कोशिश कर चुके हैं। हालांकि यह समझना थोड़ा मुश्किल जरूर है कि वह पीएम बनने के लिए अपनी वर्षों से कमाई हुई इज्जत को दांव पर क्यों लगा रहे हैं? भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं, पर यह जगजाहिर हो चुका है पार्टी के कार्यकर्ता और देश के युवा मोदी को पीएम पद पर देखना चाहते हैं।













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