भाजपा को सत्ता तक ले गये आडवाणी
बैंगलोर। गोवा में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख बनाये जाने से निराश भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी के अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह पहला मौका था जब आडवाणी पार्टी की कार्यकारिणी बैठक में नहीं गये। उन्होने अपना इस्तीफा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखकर दिया।
भाजपा को प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी बनाने और सत्ता में लाने का प्रमुख श्रेय आडवाणी को ही जाता है। वैसे अगर पार्टी को दी गई सेवाओं को देखें तो 1951 में जनसंघ की स्थापना के बाद वह 1957 तक पार्टी के महासचिव रहे। उन्होने 1973 से 1977 तक जनसंघ के अध्यक्ष का कार्यभार भी संभाला। सन 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद वह 1986 तक वह पार्टी के महासचिव भी रहे।
पार्टी अध्यक्ष के रूप में आडवाणी ने 1986 से 1991 तक अपनी सेवाएं दी। बताया जा रहा है कि उन्हें लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर पार्टी में एक राय नहीं थी। पार्टी के कुछ नेता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को नेतृत्व देने के पक्ष में थे, अंतत: यही हुआ। हालांकि प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद मोदी ने आडवाणी से आर्शीवाद लिया था।
मोदी को भाजपा में फ्रंटफुट पर लाने से कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं। अपनी नाराजगी जताते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज भी कल पार्टी बैठक में देर से पहुंची। अपने पत्र में आडवाणी ने पार्टी के वर्तमान हालातों पर चिंता भी जताई और कहा कि मुझे लगता है कि पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही और अब इसमें जो भी हो रहा है उससे मैं निराश हूं।

जन्म और शिक्षा
आठ नवंबर, 1927 को वर्तमान पाकिस्तान के कराची में लालकृष्ण आडवाणी का जन्म हुआ था । उनके पिता श्री के डी आडवाणी और माँ ज्ञानी आडवाणी थीं । विभाजन के बाद भारत आ गए आडवाणी ने 25 फ़रवरी, 1965 को कमला आडवाणी से विवाह किया। आडवाणी के दो बच्चे हैं। लालकृष्ण आडवाणी की शुरुआती शिक्षा लाहौर में ही हुई पर बाद में भारत आकर उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से लॉ में स्नातक किया ।

लाल कृष्ण आडवाणी
लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ट नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी बनाने में उनका सर्वाधिक योगदान है। वे कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। २००८ में एन डी ए ने लोकसभा चुनावों को आडवाणी के नेतृत्व में लडने तथा जीत होने पर उन्हे प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की थी लेकिन पार्टी चुनाव नहीं जीत सकी।

आज ही दिया इस्तीफा
आडवाणी ने गोवा में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में स्वास्थ्य खराब होने के कारण जाने से इनकार कर दिया। बैठक खत्म हो जाने के अगले ही दिन उन्होने पार्टी के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि आज सुबह ही उन्होने अपना इस्तीफा राजनाथ सिंह को सौंप दिया था। जिसके कारण उन्हें मनाने के लिए राजनाथ उनके घर भी गये।

पार्टी में बने रहेंगे
वयोवृद्ध नेता आडवाणी ने भले ही पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया हो पर वह पार्टी में बने रहेंगे। उन्होने इस्तीफे में भी यह जिक्र किया कि अब पार्टी में देश नहीं बल्कि व्यक्तिगत हित सर्वोपरि हो गये हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दी
लाल कृष्ण आडवाणी 1986 से 1991 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे। वह एक ऐसे जननायक के रूप में जाने जाते हैं जिन्होने हिंदुत्व का समर्थन किया और इसी एजेंडे के दम पर वह पार्टी को सत्ता में लाने में कामयाब रहे।












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