अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए कठोर निर्णय हेतु बचनबद्ध: मनमोहन सिंह

Prime Minister Manmohan Singh
टोक्यो। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार देश की अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हित में कटोर व मुश्किलभरे निर्णय लेने के लिए बचनबद्ध है। मनमोहन ने जापान के व्यापारिक परिसंघ, निप्पन कीडनरेन द्वारा आयोजित भोज में कारोबारी एवं औद्योगिक हस्तियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सरकार अपनी अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक हित में कठोर एवं मुश्किल भरे निर्णयों के लिए बचनबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में हमने अर्थव्यवस्था में जान डालने के लिए कई कदम उठाए हैं। हमने राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में लाने की प्रक्रिया शुरू की है और राजकोषीय समेकन के लिए एक मध्यकालिक रास्ते का खाका भी खीचा है। हमने विशेष तंत्र स्थापित कर विशाल परियोजनाओं के क्रियान्वयन को रफ्तार दी है। ये तंत्र इसलिए स्थापित किए गए हैं ताकि विभिन्न विनियामक मंजूरियों में विलम्ब न हो। हमने निवेश के लाभ बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने बहुब्रांड खुदरा, विद्युत एक्सचेंच और नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को उदार बनाया है तथा इसे और युक्तिसंगत व सरल बनाए जाने की योजना है। हमने वित्त बाजार में और सुधार पेश किए हैं। केंद्रीय बैंक (आरबीआई) ने संकेत दिए हैं कि नए बैंकों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मनमोहन ने कहा कि जापानी बैंकों को भारत के महानगरीय इलाकों में शाखाएं खोलने के लाइसेंस दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दीर्घकालिक विनिमय व्यवस्था से सम्बंधित समस्याओं को सुलझाना चाहती है।

मनमोहन सिंह ने आशावादिता के साथ कहा कि जापान द्वारा परियोजना के लिए उपलब्ध कराए गई 4.5 अरब डॉलर की पहली किश्त से क्रियान्वित की जाने वाली कई प्राथमिकतावाली परियोजनाएं सूचीबद्ध कर ली गई हैं। हमने दिल्ली मुम्बई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी) परियोजना को प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र की तरह ऋण देने से सम्बंधित मुद्दों को सुलझा लिया है। विदेशी मुद्रा उधारी सम्बंधित प्रतिबंधों में ढील दी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं समझता हूं कि दीर्घकालिक विनिमय व्यवस्था से सम्बंधित कुछ समस्याएं अभी बनी हुई हैं।

हम इन समस्यओं को सुलझाने के लिए अच्छे सुझावों पर विचार करेंगे। मुझे यह कहने में भी खुशी हो रही है कि जापानी बैंकों को भारत के महानगरीय इलाकों में शाखाएं खोलने के लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। मनमोहन सिंह रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सम्बंधों को बढ़ावा देने के लिए तीन दिवसीय जापान यात्रा पर हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा 18 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हमारी सम्भावनाओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यापार को बढ़ाकर तथा इसे और व्यापक व संतुलित बनाकर अपने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की पूर्ण सम्भावना का दोहन करना चाहिए। मुझे आशा है कि फार्मास्युटिकल्स और आईटी सेवा जैसे हमारी निपुणता वाले क्षेत्रों में भारतीय कम्पनियों के लिए जापान अधिक उदार रहेगा और अपने दरवाजे खुला रखेगा। (आईएएनएस)

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