बापू के खून की नीलामी पर तुषार गांधी दु:खी
लंदन। ब्रिटैन के श्रॉफशायर में महात्मा गांधी के खून के कतरे की नीलामी होने जा रही है। आज बापू के खून की कीमत 10 हजार से 15 हजार पाउंड्स तक लग सकती है। उधर बापू का खून नीलाम होने जा रहा है, इधर उनके परपौत्र तुषार गांधी खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर इंग्लैंड की किसी महारानी या राजा के रक्त का कतरा होता, तो शायद वो उसे राष्ट्र की संपत्ति के रूप में सहेज कर रख लेते, लेकिन अफसोसनाक कि भारत सरकार ने इस बारे में सोचा तक नहीं।
तुषार गांधी से बातचीत के लिये सीएनएन आईबीएन ने पब्लिक को प्लेटफॉर्म मुहैया कराया, जिसमें से कुछ सवाल और उनके जवाब हम आपके लिये लेकर आये हैं। बापू के खून की नीलामी पर आप इतने शांत क्यों बैठे रहे? इस सवाल पर तुषार ने कहा कि जब बापू के चश्में व अन्य चीजों की नीलामी हुई थी, तब मैंने बहुत प्रयास किये नीलामी रुकवाने के। मैंने भारत सरकार से बिनती भी की, कि सारी चीजें भारत आनी चाहिये, लेकिन यह शर्मनाक बात है कि भारत सरकार की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। मैं शुक्रगुजार हूं यूबी ग्रुप के विजय माल्या का जो वो सारी चीजें खरीद कर भारत ले आये।
तुषार गांधी से सवाल किया गया कि इस नीलामी को परिवार के किसी सदस्य ने रोकने के प्रयास क्यों नहीं किये? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि अगर मेरे बस में होता तो मैं जरूर रोक देता। जब बापू के खून की बूंद की नीलामी की बात आयी तो मैं खुद को लाचार महसूस कर रहा था।
आम जनता ने पूछा कि अगर इंग्लैंड की रानी या राजा का या फिर अमेरिका के किसी बड़े नेता का रक्त होता तो क्या उसकी नीलामी होती? तुषार का जवाब- ब्रिटेन के राज घराने से जुड़े लोगों या अमेरिका के किसी नेता के खून की नीलामी की बात आती, तो निश्चित तौर पर वे अपने देश की धरोहर समझ कर उसे सहेज कर रख लेते लेकिन नीलाम नहीं करते।
प्रश्न आया कि इस नीलामी से क्या मिलने वाला है, इससे हमें क्या मिलेगा? इस पर तुषार बोले कि ऐसी नीलामी यह देखने के लिये होती हैं कि लोगों के अंदर ऐतिहासिक चीजें खरीदने का कितना जज़्बा व शौक है और आप इसे रोक नहीं सकते, ये होती रहेंगी बार-बार।
खून की नीलामी पर जब तुषार गांधी से पूछा गया कि आप कूटनीतिक और राजनीतिक दोनों ही शक्तियों के संपर्क में हैं, तो क्या आपने नीलामी को रोकने के प्रयास किये? तुषार गांधी- मेरा इस बात पर पर मेरा खून भी उतना ही खौलता है कि मेरे पूर्वज के रक्त को बाजार में बेचा जा रहा है और मैं कुछ कर नहीं पा रहा हूं। अफोसजनक बात यह है कि मेरे पास कोई राजनीतिक या कूटनीतिक पावर नहीं है।













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