फेसबुक को बनाया IAS इम्‍तहान पास करने का हथियार

[अजय मोहन] देश के सबसे बड़े इम्‍तहान सिविल सर्विसेस को पास करने वाले लगभग सभी लोगों ने बताया होगा कि उन्‍होंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की, टाईम मैनेजमेंट का खास खयाल रखा और अखबारों को पढ़ने का जरिया बनाया, लेकिन 750 रैंक हासिल करने वाले अंजय तिवारी ने इन सबके साथ-साथ फेसबुक को अपनी सफलता का हथियार बनाया।

वनइंडिया से खास बातचीत में अंजय तिवारी वो मंत्र बताया, जो शायद ही कोई फेसबुक पर खोजता होगा। जी हां अंजय ने बताया कि उन्‍होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी 12वीं के तुरंत बाद से शुरू कर दी थी। तब तक इंटरनेट का बूम आ चुका था, लेकिन जब फेसबुक आया तो वो पहले इसे ज्‍वाइन करने से हिचकिचाते रहे, लेकिन जब उनके मित्रों ने ज्‍वाइन किया तो उन्‍होंने भी सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में कदम रखा। बस एक खासियत रही। सोशल नेटवर्किंग को मनोरंजन और टाईम पास की जगह अंजय ने ज्ञान के महासागर की धाराओं को अपनी ओर खींचने के लिये किया।

अंजय बताते हैं कि वो रात-रात भर अपने दोस्‍तों के साथ चैटिंग करते थे, लेकिन चैटिंग का विषय हमेशा नॉ‍लेज गेन करने के मकसद से होता था। दोस्‍त अकसर चैट के जरिये ऐसे-ऐसे लिंक भेज देते थे, जहां से अपने विषय से जुड़ा ज्ञान मिलता था। उसी प्रकार अंजय भी अपने मित्रों के साथ ऐसी ही जानकारियां शेयर करते थे। अंजय बताते हैं कि फेसबुक पर उन्‍होंने मित्रों के साथ एक ग्रुप बनाया, जिसमें हम विषय से संबंधित ही डिसकशन करते हैं। उस ग्रुप में हम पढ़ाई से जुड़ी चीजों को डिसकस करते हैं।

रही बात इंटरनेट की तो अंजय का कहना है कि सिद्धार्थनगर जैसे शहरों में अगर आप 'द हिन्‍दू' अखबार मंगवायें तो 4 दिन बाद भी मिलना मुश्किल होता है, जबकि इंटरनेट के जरिये आप ई-पेपर को पढ़ सकते हैं और वही उन्‍होंने किया। अंजय सभी बड़े अखबारों व मैगजीन के ई-पेपर को ही पढ़ते हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट एक बहुत अच्‍छा माध्‍यम है ज्ञान बटोरने का बस इसका सही इस्‍तेमाल करना आना चाहिये।

बेटी पैदा होते ही हुआ आईएएस में सेलेक्‍शन

अंजय का परिवार भारत के उन लोगों के लिये सबक साबित हुआ है, जो बेटी के पैदा होने पर खुश नहीं होते। उनकी बेटी परिवार के लिये इतनी लकी साबित हुई कि उसके पैदा होते ही अंजय का आईएएस में सलेक्‍शन हुआ। अंजय की शादी पिछले साल हुई थी। उनकी पत्‍नी ने एमबीए किया हुआ है और वो भी सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रही हैं।

12वीं तक विज्ञान के विषयों से पढ़ने वाले अंजय गणित में काफी अच्‍छे थे, लेकिन फिर भी उन्‍होंने बीएससी या आईआईटी-जेईई की तैयारी करने के बजाये बीए चुना और इतिहास और मध्‍यकालीन इतिहास से बीए करने के बाद इक्‍नॉमिक्‍स से ही एमए किया। यह दोनों डिग्री इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से हालिस की। अंजय बताते हैं कि अखबार के एडिटोरियल यानी संपादकीय पढ़ना बहुत जरूरी होता है। सिर्फ पढ़ना ही काफी नहीं, उसके बाद खुद के विचारों को उभार कर ऊपर लाना जरूरी होता है। अंजय कहते हैं कि आम तौर पर लोग बीए करने वालों को बड़ी तुच्‍छ नजरों से देखते हैं, जबकि मेरा मानना यह है कि सबजेक्‍ट कोई भी हो, अगर आपने पूरी रुचि के साथ पढ़ाई की है, तो आप बड़े-बड़ों को मात दे सकते हैं।

बैंक में ब्रांच मैनेजर के पद पर हैं तैनात

अंजय ने एमए करने के बाद बैंकिंग सर्विसेज में सफलता हालिस की और इस समय वो बैंक में बतौर ब्रांच मैनेजर कार्यरत हैं। शादी के बाद ग्रहस्‍थ जीवन और ऊपर से तमाम जिम्‍मेदारियों से भरी नौकरी। इन सबके बावजूद अंजय ने आईएएस परीक्षा में सफलता हासिल की। यह सब हुआ सही टाइम मैनेजमेंट की वजह से। अंजय बताते हैं कि इसमें उनके परिवार और पत्‍नी ने भरपूर सहयोग दिया। पत्‍नी ने बार-बार मनोबल बढ़ाया। उनका कहना है कि दोस्‍तों का भी खूब सपोर्ट मिला।

रेवेन्‍यू सेक्‍टर में जाना चाहते हैं अंजय

अंजय से जब हमने पूछा कि वो आईएएस क्‍यों बनना चाहते थे, तो उन्‍होंने कहा कि कोई भी आईएएस तीन कारणों से बनना चाहता है- पहला रुतबा हासिल करने के लिये, दूसरा अच्‍छा पैकेज और तीसरा समाज के लिये कुछ करने की चाह। मेरे अंदर समाज के लिये कुछ करने की चाह है और वही मुझे आगे करना है। अंजय ने कहा, "मैं बैंक की नौकरी के वक्‍त भी लोगों से हमेशा करीब से जुड़ा रहा। बैंक में अमीर-गरीब सब आते हैं सभी से मुझे जुड़ना काफी पसंद है।"

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