Exclusive: भूकंप की दृष्टि से सेफ नहीं है दिल्ली
[अजय मोहन] मंगलवार को शाम 3:45 बजे ईरान में भूकंप की तरंगें उठीं और तबाही मचाते हुए शाम 4:15 बजे दिल्ली तक पहुंच गईं। ईरान में भारी तबाही का मंजर दिखने लगा और सरकार ने 100 से अधिक मौतों की आशंका व्यक्त कर दी। वहीं दिल्ली व एनसीआर समेत कई अन्य शहरों में भूकंप के झटके महसूस किये गये। दिल्ली में नुकसान नहीं हुआ इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रीय राजधानी पूरी तरह सुरक्षित है। बल्कि भूवैज्ञानिकों की मानें तो दिल्ली भूकंप की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है।
जी हां हम उसी दिल्ली की बात कर रहे हैं, जहां बिना परमिट के इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं, जहां भूकंप-निरोधी नियमों को दरकिनार करने में जरा भी देर नहीं की जाती है। वह एनसीआर भी उस ज़ोन में शामिल है, जहां कॉन्क्रीट के जंगल घने होते जा रहे हैं। हमने जब लखनऊ विश्वविद्यालय के एडवांस लर्निंग सेंटर ऑफ जियोलॉजी के प्रो. ध्रुव सेन सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि दिल्ली में तो जरा भी रिस्क लेना तबाही मो न्योता देने के बराबर है।
प्रो. ध्रुव सेन ने बताया कि भूकंप की दृष्टि से भारत कों पांच ज़ोन में बांटा गया है, जिसमें जोन 1 सबसे सुरक्षित, फिर 2 थोड़ा कम सुरक्षित और ऐसे ही 3, 4 और फिर जोन 5 सबसे असुरक्षित माना जाता है। सभी ज़ोन तस्वीर में देख सकते हैं। बात अगर उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, वाराणसी की करें, तो यहां पर गंगा नदी की बेल्ट होने की वजह से बलूवी मिट्टी जमीन के अंदर होने से भूकंप की तरंगें कम हो जाती हैं, लिहाजा इन्हें सुरक्षित माना जा सकता है।
दिल्ली का पूर्वी भाग कुछ हद तक सुरक्षित मान भी सकते हैं, लेकिन पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली में पहाडि़यां होने के कारण वहां जमीन के नीचे का हिस्सा कठोर एवं पथरीला होता है, लिहाजा यहां भूकंप के झटके ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।













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