अपने राजनीतिक दांव से सबको हैरान कर रहे हैं मुलायम सिंह

जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे मुलायम को पता है कि बिना समर्थन के उनके सपने को पंख नहीं लग सकता है। वह आडवाणी और जनसंघ नेताओं की तारीफ करके भाजपा के अंदर अपने प्रति सहानुभूति पैदा करना चाहते हैं जिससे कि चुनाव बाद उनको अगर भाजपा के समर्थन की दरकार पड़े तो उसमें ज्यादा कठिनाई न हो। राजनीतिक विश्लेषक रमेश दीक्षित कहते हैं कि 1989 में भाजपा ने वीपी सिंह को बाहर से समर्थन देकर गैर कांग्रेसी सरकार का गठन कराया था। मुलायम को लग रहा है कि अगर लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में न हुई और समाजवादी पार्टी चालीस से ज्यादा सीटें जीत लेती है तो भाजपा के समर्थन से वीपी सिंह की तर्ज पर प्रधानमंत्री बनने का उनका सपना पूरा हो सकता है।
शायद इसीलिए वह अभी से माहौल बनाकर भाजपा में अपने लिए स्थान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दिनों संसद में मुलायम ने कहा था कि अगर भाजपा कश्मीर और मुसलमानों के प्रति अपना नजरिया बदल लें तो सपा से उसकी दोस्ती हो सकती है। उधर बुधवार को चित्रकूट में चल रही भाजपा उत्तर प्रदेश इकाई की कार्यसमिति की बैठक में आडवाणी ने कहा कि भाजपा को मुसलमानों के प्रति अपना नजरिया बदलना चाहिए। इन बयानों से सपा और भाजपा की नजदीकी के संकेत मिलते दिख रहे हैं। कुछ राजनीतिक पंडितों का हालांकि कहना है कि मुलायम सोची समझी रणनीति के तहत आडवाणी की तारीफ करके प्रधानमंत्री पद के रूप में परोक्ष रूप से उनका नाम आगे करने की कयावद कर रहे हैं जिससे कि मोदी की दावेदारी को पीछे धकेला जा सके।
राजनीतिक विश्लेषक एच़ एऩ दीक्षित कहते हैं कि मुलायम को लगता है कि मोदी का नाम प्रधानमंत्री के रूप में भाजपा द्वारा आधिकारिक रूप से लाने पर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा की सीधी लड़ाई हो सकती है। इस स्थिति में वह अप्रासंगिक हो सकते हैं। ऐसे में वह आडवाणी को बड़ा नेता बताकर प्रधानमंत्री की रेस में शामिल करना चाहते हैं, जिससे मोदी का नाम न आगे आए। भाजपा और आडवाणी को बीते समय में जमकर कोसने वाले मुलायम के चौंकाने वाले अंदाज में सुर बदलने पर कांग्रेस नेता भी कुछ इसी तरह की राय जता रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद जगदम्बिका पाल कहते हैं कि भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री के पद के लिए आगे करने की कोशिश कर रही है। ऐसा लग रहा है कि मुलायम के ताजा बयान मोदी के मुकाबले आडवाणी को खड़ा करने की कयावद है। कुछ जानकारों का मानना है कि मुलायम भाजपा और जनसंघ नेताओं की तारीफ करके कांग्रेस को डराना चाहते हैं। साथ ही कांग्रेस के खिलाफ हमला करके वह खुद को उससे अलग दिखाना चाहते हैं, जिससे केंद्र सरकार के घोटालों और भ्रष्टाचार को लेकर जनता की नाराजगी का खामियाजा चुनाव में समाजवादी पार्टी को न भुगतना पड़े। (आईएएनएस)












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