यूपी में भाजपा के सामने संगठन की गंभीर चुनौती

भाजपा नेताओं के अनुसार, चित्रकूट में आयोजित दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में आगामी लोकसभा चुनाव की जीत में उत्तर प्रदेश के योगदान की रणनीति बनाने के साथ ही कुछ प्रमुख विषय रखे जाएंगे। फिर उन पर विचार-विमर्श से निकले निष्कर्षो के आधार पर आगे का रोडमैप बनाया जाएगा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का ग्राफ कैसे बढ़ाया जा सकता है। पर भाजपा प्रदेश नेतृत्व के समक्ष तो मुख्य संगठन की ही चुनौती खड़ी है।
वर्तमान समय में केंद्र में जिस तरह के राजनीतिक हालात हैं, उससे 2014 के चुनाव से पहले इसी साल अक्टूबर-नवम्बर में लोकसभा के चुनाव होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा है। अगर इसी साल चुनाव हो गया तो सर्वाधिक 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतकर निर्णायक भूमिका अदा करने के भाजपा के सपने को अधूरी तैयारियों से झटका लग सकता है।
लक्ष्मीकांत वाजपेई के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के लगभग चार महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक वह प्रदेशभर में मुख्य संगठन का ढांचा तैयार नहीं कर पाए हैं। कई जिलों में अभी तक भाजपा के जिलाध्यक्ष महानगर अध्यक्ष तय नहीं हो पाए हैं। अगर कहीं पर अध्यक्ष बन भी गए हैं तो उनकी कार्यसमिति तय नहीं हो पाई है। प्रकोष्ठों और मोचोर्ं का भी कमोवेश यही हाल है। वहां भी अभी तक कार्यसमिति यानी पूरी टीम तय नहीं हो पाई है।
वाजपेई कहते हैं कि हमारी पूरी कोशिश होगी कि अगले एक माह के अंदर मुख्य संगठन के साथ मोचोर्ं एवं प्रकोष्ठों की पूरी टीम का गठन कर लिया जाए। उन्होंने दावा किया कि भले ही संगठन तैयार नहीं हो पाया, लेकिन कार्यकर्ता और पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। किसी भी चुनाव में बूथ कमेटियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। पर भाजपा में अभी तक मुख्य संगठन ही नहीं बन पाया है तो बूथ कमेटियों की स्थिति समझी जा सकती है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि यह बात सही है कि सारे जिला अध्यक्षों एवं महानगर अध्यक्षों के नाम तय हो जाने के बाद जल्द से जल्द जिला कमेटियों और फिर बूथ कमेटियों का गठन कर लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मामले में उत्तर प्रदेश में भाजपा बाकी अन्य दलों से सबसे आगे नजर आएगी।












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