सपा और बसपा ने दी सरकार को राहत
नई दिल्ली। डीएमके के यूपीए से समर्थन वापस ले लेने के बाद सरकार अब अल्पमत में आ गयी है। जिसके बाद अब सरकार को सपा और बसपा से उम्मीदें हैं। हालांकि दोनों पार्टियां अब भी अपनी मांगों को लेकर एक दूसरे के सामने हैं। जहां उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि सरकार प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाये और चुनाव की जल्दबाजी न करें वहीं सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का कहना है कि सरकार जल्दी चुनाव कराये। लेकिन इन दोनों ही पार्टियों का सरकार को समर्थन देना तय है।
गौरतलब है कि डीएमके की समर्थन वापसी के बाद सरकार अल्पमत में आ गयी है और अब उसके पास केवल 232 सांसद ही बचे हैं लेकिन सपा और बसपा के रहते सरकार पर कोई संकट नहीं है, इस बात की पुष्टि कल वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भी कर दी थी। एफडीआई मुद्दे पर भी यह देखा गया था कि इन दोनों पार्टियों ने सरकार को समर्थन दिया था।

वहीं डीएमके के नेता टी आर बालू के अनुसार आज 11 बजे पार्टी के पांचों सांसद इस्तीफा दे देंगे। डीएमके की मांग थी कि सरकार 22 मार्च को होने वाली अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद की बैठक में श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर कड़ा प्रस्ताव लाये पर सरकार का कहना है कि विदेश नीति के कारण ऐसा करना सम्भव नहीं हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। अत: अब सरकार सपा और बसपा की सहायता पर निर्भर है।
अगर सूत्रों की माने तो सपा और बसपा ने सरकार को समर्थन देने की बात कहकर यूपीए को कुछ राहत जरूर दी है और जल्द चुनाव होने की सम्भवना को भी फिलहाल टाल दिया है।












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