गांव जहां लड़कियों का होता है जनेऊ

पटना। महिलाओं के लिए नैतिकता के पैमाने गढ़े जाने के बीच बिहार के एक गांव की महिलाओं ने परम्पराओं और पुरुषवादी मानसिकता को बदलने वाला उदाहरण पेश किया है।

राजधानी पटना से 150 किलोमीटर दूर बक्सर जिले के मैनिया गांव में पिछले तीन दशक से लड़कियों का उपनयन संस्कार कराया जाता है जो कि सामान्यत: ब्राह्ण लड़कों के बीच होता है। यहां की लड़कियां लड़कों की तरह धागे से बने जनेऊ भी पहनती हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धेश्वर शर्मा ने कहा, "तीन दशक से चली आ रही यह रोचक कहानी है। विश्वनाथ सिंह ने 1972 में मैनिया में लड़कियों के लिए उस वक्त एक स्कूल की स्थापना की थी जब महिलाओं को स्कूल जाने से रोका जा रहा था। उन्होंने अपनी चार बेटियों को स्कूल भेजना शुरू किया, इससे दूसरी लड़कियां भी प्रेरित हुईं। इसके बाद विश्वनाथ ने अपनी बड़ी बेटी का जनेऊ संस्कार कराया। इसके बाद इसका अनुसरण दूसरों ने भी किया और अब यह पूरे गांव में होता है।"

Village where girls having upnayan sanskar

इस परम्परा की शुरुआत करने वाली मीरा कुमारी अपनी तीन बहनों के साथ अभी भी जनेऊ पहनती हैं। पेशे से शिक्षक मीरा ने कहा, "जनेऊ पहनना इस बात का प्रतीक है कि हम पुरुषों से किसी भी रूप में कम नहीं हैं।"

शर्मा के मुताबिक इस परम्परा ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरुकता पैदा करने के लिए गांव की चर्चित कर दिया है। उनके मुताबिक गांव की 24 से अधिक लड़कियां जनेऊ पहन कर स्कूल आती हैं। शर्मा ने कहा, "महिलाओं की इस परम्परा ने गांव के पुरुषों की मानसिकता बदली है और अब वे महिलाओं के साथ भेदभाव की हिम्मत नहीं करते।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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