नरेंद्र मोदी करेंगे नेतृत्‍व तो सपा इन, जदयू आउट

नई दिल्ली (वनइंडिया ब्‍यूरो)। भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी में पूरे शो पर जिस तरह नरेंद्र मोदी छाये रहे, उससे यह साफ हो गया है कि लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा नेतृत्‍व वाली एनडीए की बागडोर मोदी के हाथों में रहने वाली है। इसमें नई बात क्‍या है। अरे नई बात तो यह है कि ऐसा होने पर समाजवादी पार्टी एनडीए का दामन थामेगी और शरद यादव के नेतृत्‍व वाली जदयू एनडीए को बाय-बाय कर देगी।

यह हम नहीं बल्कि वर्तमान राजनीतिक समीकरण कह रहे हैं। हुआ यूं कि भाजपा की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी से ठीक पहले राजनाथ सिंह ने मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात साधारण नहीं थी, क्‍योंकि यहीं पर सपा-भाजपा के पुरानी खटास को मिठास में बदलने का काम किया गया। मुलायम जो यूपीए के साथ होते हुए भी साथ नहीं हैं, अब एक ऐसा ठौर खोज रहे हैं, जहां उनका और उनके बेटे अखिलेश का करियर सेफ हो जाये।

तो यूपीए क्‍यों नहीं

आप सोच रहे होंगे कि मुलायम जब यूपीए के साथ पहले से हैं, तो दिक्‍कत किस बात की। तो हम आपको बता दें कि मुलायम सिंह यह अच्‍छी तरह जानते हैं कि वो चाहे यूपीए के कितने ही करीब क्‍यों न हो जायें, उन्‍हें कोई खास पद नहीं मिलने वाला, क्‍योंकि कांग्रेस पार्टी में पद उसी को मिलता है, जो सोनिया गांधी के लिये खास हो। एनडीए की बात करें तो चूंकि गुजरात से भाजपा की लहर उठ चुकी है, तो उसी लहर के सहारे कई पार्टियों के जहाज किनारे पर आना चाहेंगे, जिनमें एक जहाज का नाम सपा भी है।

एक और अहम बात यह भी कि अब मुलायम ने प्रधानमंत्री बनने का सपना थोड़े दिन के लिये किनारे कर दिया है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि यूपीए और एनडीए के साथ रहकर ऐसा संभव नहीं और तीसरे मोर्चे के गठन की कोई उम्‍मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है, क्‍योंकि वाम दलों की हालत खस्‍ता है। अगर तीसरा मोर्चा बना भी तो वहां मायावती और ममता बनर्जी का दबदबा होगा।

मोदी के संग क्‍या मिलेगा

भाजपा में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में देखे जा रहे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आकर्षण के केंद्र बने रहे। उन्हें 'लोकप्रिय मुख्यमंत्री' के खिताब से नवाजा। लिहाजा अगर एनडीए की सरकार बनीं और मुलायम उसके साथ रहे, तो निश्चित तौर पर एनडीए शासित राज्‍यों को गुजरात जैसा बनाने की हर संभव कोशिश की जायेगी और तब बहती गंगा में उत्‍तर प्रदेश का भी उद्धार हो सकेगा। और यही मुलायम सिंह की इच्‍छा भी है।

अब देखें राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी में मोदी का जलवा

पार्टी अध्‍यक्ष राजनाथ सिंह ने मोदी की तारीफों के जमकर पुल बांधे। उन्‍होंने कहा, "नरेंद्र मोदी को गुजरात में तीसरी बार मिली सफलता पर हर कार्यकर्ता और नेता को गर्व है। पार्टी ने एक व्यक्ति के नेतृत्व में इस तरह की सफलता पहले नहीं देखी। यह भाजपा में एक नया इतिहास है। अमेरिका एवं यूरोपीय देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने गुजरात में हुए विकास तथा बेहतर प्रशासन की प्रशंसा की है।"

दिल्ली भाजपा के प्रमुख विजय गोयल समेत कई नेताओं ने उन्‍हें पीएम कैंडिडेट घोषित करने की बात कह डाली। राजनाथ ने 90 मिनट के अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से इस साल होने जा रहे कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली के चुनाव के लिए सक्रिय होने का आह्वान किया। उनहोंने कहा कि ये सभी चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, "2013 हमारे लिए महत्वपूर्ण वर्ष है। लोकसभा चुनाव भी किसी भी समय हो सकता है।"

क्‍या होगा जदयू का

जदयू में अहम भूमिका रखने वाले बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार काफी पहले से मोदी से दूरियां बनाये हुए हैं। लिहाजा यह बात तय मानी जा रही है कि अगर मोदी को पीएम कैंडिडेट घोषित किया गया, तो जदयू एनडीए से नाता तोड़ देगी। वैसे नीतीश के लिये यह बड़ी बात नहीं होगी, क्‍योंकि बिहार का चौतरफा विकास कर नीतीश ने अपनी पार्टी के बेस को काफी मजबूत कर लिया है। अब भाजपा साथ नहीं भी होगी, तो भी बिहार से जदयू को उखाड़ फेंकना आसान नहीं होगा।

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