हैदराबाद धमाके- अब पाकिस्तान को कोसना बंद करें!
हैदराबाद में हुए दो शक्तिशाली धमाकों में 16 लोगों की मौत के बाद अब पाकिस्तान को नहीं कोसना चाहिये? आप सोच रहे होंगे कि हम पाकिस्तान का फेवर कर रहे हैं? सही मायने में हम पड़ोसी देश का फेवर नहीं बल्कि घर में बैठे आस्तीन के सांपों की बात कर रहे हैं। हर बार बम धमाके होते हैं और जब उसके पीछे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद या इंडियन मुजाहिदीन का आता है, तो हम पाकिस्तान पर बरस पड़ते हैं।
क्या यह जायज़ है? नहीं, क्योंकि बिना स्थानीय लोगों के सहयोग से पाकिस्तान हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकता। हैदराबाद के दिलसुखनगर में आतंकवाद खुद चलकर आया, वो भी साईकिल पर। जरा सोचिये साईकिल की अधिकतम गति किनती होगी? अगर साईकिल में बम लगा हुआ है तो ज्यादा से ज्यादा 20 किलोमीटर या हो सकता है आतंकी पैदल ही साईकिल घसीट कर लाया हो और सिनेमा हॉल के बाहर खड़ी करके चला गया हो।

फॉरेंसिक टीमों के अनुसार इसमें आईईडी का इस्तेमाल हुआ और प्रत्येक बम में एक किलो आरडीएक्स था। क्या एक व्यक्ति सीधे पाकिस्तान से एक किलो आरडीएक्स लाकर हैदराबाद में धमाका कर सकता है? नहीं। स्थानीय व्यक्ति के सहयोग के बिना यह नामुमकिन है। बम की प्लानिंग भले ही सरहद पार कर ली जाये, लेकिन अंजाम देने के लिये किसी न किसी हिन्दुस्तानी का हाथ जरूर होता है। अगर हमारे देश के वो चंद लोग ही पाकिस्तान को मना कर दें, तो क्या ऐसी खून की होली हो सकती है?
संसद में आज महाराष्ट्र के सांसद आनंद गंगाराम ने एक बात एकदम सटीक कही। उन्होंने कहा, "हमारी खुफिया एजेंसियों को पता है कि देश में इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन कहां-कहां सक्रिय हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ इसलिये नहीं होती, क्योंकि लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। देश की सुरक्षा भावनाओं से कहीं ऊपर है। हमें अब ऐसे संगठनों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।" सांसद गंगाराम की बात में दम है, क्योंकि सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे संगठन हमारे देश की धरती पर ही फलफूल रहे हैं। इन संगठनों का खातमा सिर्फ सख्ती बरतने से ही हो सकता है। अब वक्त आ गया है, जब हम पाकिस्तान को कोसना बंद करें और कार्रवाई करें।












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