पत्थरों पर लगे 20 करोड़ बिना दिये निकल गईं मायावती
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक रही मायावती सरकार में मूर्तियों, स्मारकों और पत्थरों के नाम पर हुए घोटालों के बारे में आप पहले से जानते होंगे, लेकिन क्या आपको मालूम है, जिन पार्कों का निर्माण मायाववती ने बतौर सीएम करवाया, वहां लगे पत्थरों की कीमत बगैर दिये ही वो निकल गईं। कीमत कोई दो-चार हजार नहीं बल्कि 20 करोड़ रुपए है।
असल में मिजार्पुर के पत्थर व्यवसायियों ने बहुजन समाज पार्टी सरकार के समय में विभिन्न पार्को एवं स्मारकों में लगे पत्थरों के बकाया 20 करोड़ रुपये भुगतान न दिए जाने पर लोकायुक्त को पत्र लिखकर भुगतान कराए जाने और न्यायोचित कार्रवाई की अपील की है।

पाषाण मजदूर व्यवसायी संघ के अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि बसपा सरकार के दौरान जुलाई 2007 में मिजार्पुर से पत्थरों की आपूर्ति कराए जाने के संबंध में उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया। आपूर्ति शुरू कराने के लिए कंसोर्टियम का गठन भी हुआ, जिसमें सरकार एवं व्यवसायियों के बीच 150 रुपये प्रति घनफुट की दर से भुगतान करने का निर्णय लिया गया।
सिंह ने कहा कि शुरू में तो सब कुछ सही चला पर कुछ ही समय बाद सरकार ने अपनी नीति बदल दी और बिना कंसोर्टियमों को सूचना दिए बिना अचानक यह निर्णय लिया कि अब पत्थरों का भुगतान निर्माण निगम लखनऊ के ठेकेदारों को करेगा, ठेकेदार पत्थर व्यवसायियों को भुगतान करेंगे तथा लखनऊ के ठेकेदारों ने व्यवसायियों का भुगतान रोक लिया और अब तक भुगतान नहीं किया गया।
पत्थर व्यवसायियों ने 2009 में शासन के उच्चधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले से अवगत भी कराया तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव द्वारा मामले पर संज्ञान लिये जाने के बावजूद भी निगम के उच्चाधिकारियों एवं लखनऊ के ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में पत्थर घोटालों की जो जांच चल रही है, उसमें यह मुद्दा भी उठाया जाए एवं लोकायुक्त से आग्रह किया गया है कि मामले की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाए तथा मिजार्पुर के पत्थर आपूर्तिकर्ताओं को बकाये रकम का भुगतान कराया जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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