कश्मीर में अफजल गुरु का कब्र तैयार

afzal grave
श्रीनगर। संसद हमले के मुख्य आरोपी को फांसी दिए जाने का बाद उसे तिहाड़ जेल परिसर में ही दफना दिया गया था। लेकिन उसकी मौत के बाद से ही उसका शव परिजनों को सौंपने की मांग उठने लगी थी। जम्मू-कश्मीर में इसके लिए लोगों ने जुलूस भी निकाला। अफजल की मौत के बाद अलगाववादियों नेताओं ने उसे शहीद-ए-वतन का दर्जा दिया है और उसके नाम से एक खाली कब्र श्रीनगर के ईदगाह में मजार-ए-शौदा में तैयार की गई है।

सरकार द्वारा शव ना मिलने का बाद इन लोगों ने इस खाली शव को ही अफलज की कब्रगाह मान लिया है। लोगों ने जिस मजार-ए-शौदा में अफजल गुरु की कब्र तैयार की है उसी मजार में मकबूल बट्ट को भी दफनाया गया था। मकबूल बट्ट जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापक सदस्यों में से एक है और खास बात ये कि उसे भी तिहाड़ जेल में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। अलगाववादियों ने उसके खाली कब्र को भी यही बनाया था और अब संसद हमले में मारे गए अफजल गुरु की भी खाली कब्र यही बनाई गई है। अफजल के लिए खाली कब्र बनाने वाले जेकेएलएफ गुट के उपाध्यक्ष ताहिर अहमद मीर का कहना है कि हमने कब्र पर अफजल गुरू के अवशेषों की मांग करता हुआ पत्थर लगाया है। ताकि सरकार हमारी भावनाओं को समझते हुए अफजल का शव हमें सौंपे।

गौरतलब है कि अफजल को फांसी देने के बाद दिल्ली के तिहाड़ जेल में ही दफनाया गया है। लेकिन अफजल के परिवार वाले उसके शव की मांग कर रहे है। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम इस बात पर विचार करेंगे लेकिन अब तक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई काम नहीं किया गया है। इससे पहले सरकार ने उसके परिवार वालों को उसके कब्रगाह पर फतिहा पढ़ने की इजाजत दे दी थी। जिसके बाद उसके परिवार वालों ने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और कहा था कि उन्हें अफजल का शव सौंपा जाए।

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