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बिहार में प्रेस की आजादी पर लगा नीतीश का बैन!

nitish kumar
पटना। कहने को मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंम्भ कहा गया है लेकिन हमारे मंत्री और राजनेता अपने निजी फायदे कि लिए प्रेस की इस आजादी को कुचलना चाहते है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी इसी तरह के आरोप लगे है। प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया ने बिहार में प्रेस की आजादी को लेकर नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया जांच रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश सरकार पर राज्य में प्रेस की आजादी को दबाने का आरोप लगा है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में साप तौर पर कहा है कि नीतीश बिहार में मीडिया का आजाद होकर काम नहीं करने देना चाहते है बल्कि प्रेस को अपना मुखपत्र बनाना चाहते है।

दरअसल कुछ दिनों से बिहार में प्रेस की स्वतंत्रता हनन की शिकायते आ रही थी, जिसके बाद प्रेस कॉउंसिल ऑफ इंडिया के चीफ जस्टिस कारजू ने तीन सदस्यों की जांच टीम वहां भेजी थी। जांच के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट प्रेस कॉउंसिल ऑप इंडिया को सौंपते हुए कहा है कि बिहार में प्रेस की स्थिति इमरजेंसी जैसी है। वहां स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता करना मुश्किल है। बिहार के ज्यादातर पत्रकार घुटन महसूस कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार नीतीश सरकार खौफ के चलते आंदोलन, प्रदर्शन, प्रशासन की कमियों को उजागर करने वाली खबरों को अखबारों में स्थान नहीं मिल पा रहा है। सरकारी प्रेशर की वजह से भ्रष्टाचार की खबरें छप नहीं पा रही है।

दरअसल बिहार का मीडिया सरकारी विज्ञापनों पर निर्भर रहता है, क्योंकि औद्योगिक रूप से पिछड़ा राज्य होने के कारण यहां से अखबारों को निजी क्षेत्र का विज्ञापन नहीं मिलता है। सरकार मीडिया की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए उसपर अपना दबाव बनाना चाहती है। नीतीश सरकार पर लगे इस आरोप के बाद राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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