प्रोमोशन में आरक्षण बिल पास, यूपीए का कुछ नहीं उखाड़ पायेंगे मुलायम

इस विधेयक के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पदोन्नति के दौरान आरक्षण दिया जायेगा। यानी अब किसी भी विभाग में सीनियर-जूनियर होने का कोई मतलब नहीं रह गया है। संविधान (में 117वें संशोधन) विधेयक, 2012 पर दो दिन बहस चली और फिर सोमवार को वोटिंग हुई। विधेयक के पक्ष में 206 सांसदों ने वोट किये जबकि मात्र 10 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किये। इस बिल का सबसे ज्यादा समर्थन बसपा ने किया।
कुल मिलाकर बसपा और सपा की इस जंग में बसपा की जीत हुई है। अगर राजनीतिक समीकरण देखें तो मुलायम इस हार का बदला चाहकर भी नहीं ले पायेंगे। रविवार को मुलायम ने हुंकार भरी थी कि अगर यह विधेयक पास हुआ तो वो केंद्र को दिये गये समर्थन पर विचार करेंगे। लेकिन सच तो यह है कि वो सिर्फ विचार करेंगे, फैसला नहीं लेंगे। और वो ले भी नहीं सकते, क्योंकि उन पर सीबीआई की तलवार लटक रही है।
यूपीए ने सीबीआई का इस्तेमाल एकदम सही समय पर किया। आय से अधिक संपत्ति के मामले में सु्प्रीम कोर्ट ने जब मुलायम की बहू डिंपल यादव को बरी किया तो सपा में खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन उसकी अगली ही लाइन में बेटे अखिलेश यादव और मुलायम के खिलाफ केस जारी रखने के आदेश दे दिये। साथ ही यह भी कहा कि सीबीआई अपने स्तर पर कार्रवाई कर सकती है, इसके लिये कोर्ट को रिपोर्ट सौंपने की भी जरूरत नहीं। इस फैसले के आते ही यूपीए के हाथ मजबूत हो गये और मुलायम की गर्दन एक बार फिर फंस गई। यानी अब चाह कर भी मुलायम यूपीए से समर्थन वापस नहीं ले सकते हैं।












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