संसद ने रचा इतिहास, गिर गया FDI के खिलाफ प्रस्ताव

हम यहां एफडीआई के समर्थन या विरोध में बात नहीं कर रहे हैं, हम बात कर रहे हैं अपने देश के सांसदों की जिन लोगों ने आज देश के सामने एक अलग मिसाल कायम की है। इन सांसदों ने कहा कुछ और और किया कुछ और। इनमें सबसे बड़ा नाम आता है मुलायम सिंह यादव और मायावती का। ये दोनों पहले दिन से एफडीआई का विरोध करते आ रहे हैं, लेकिन जब इसके खिलाफ वोट करने की बारी आयी तो वॉकआउट कर सदन से बाहर निकल गये। मजेदार बात यह है कि मुलायम ने संसद भवन के बाहर आकर भी केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की।
वोटिंग से पहले क्या हुआ सदन में-
देश की अर्थव्यवस्था को बदलने वाले ऐतिहासिक विदेशी निवेश पर दो दिन की बहस के बाद जब वोटिंग की बारी आयी तो सुषमा स्वराज ने कई नेताओं की खिंचाई कर दी।
सुषमा स्वराज ने कहा कि कपिल सिब्बल न तो अपने संसदीय क्षेत्र चांदनी चौके के लोगों को निराश नहीं करना चाहते हैं, और न ही मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को। इसके आद सुषमा ने लालू प्रसाद यादव की टांग खींचते हुए कहा, "गांठ खोलना आता नहीं, मस्खरी के अलावा आपको कुछ आता नहीं।"
इसके बाद नेता विपक्ष ने आनंद शर्मा के बयान का विरोध जताया और कहा कि जिस पत्र को लेकर वो भाजपा को एफडीआई पर सहमत मान रहे हैं, उसका मतलब यह नहीं कि भाजपा एफडीआई पर आम सहमति चाहती थी।
जदयू के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि सरकार ने इस संबंध में परामश नहीं किया। सुषमा स्वराज ने कहा कि 18 में से 14 पार्टियों ने एफडीआई के विरुद्ध भाषण दिये। चाहती तो मैं यही थी, कि भाषणों में जो सोच आयी, वही सोच वोटों में दिखती, लेकिन ऐसा नहीं होता दिख रहा है। जिन लोगों ने विपक्ष में बोला उनकी संख्या है 282 और पक्ष वालों की संख्या 224 थी। इसलिये मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहूंगा कि सदन की सोच और देश के मानस की बात सामने आ गई है, लेकिन वोट में परिलक्षित होगा। कुल 471 सांसदों ने वोटिंग की।
आज इतिहास में यह लोकसभा की कार्यवाही बनकर दर्ज हो जायेगा। मैं चाहती थी कि कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं। लेकिन मुलायम सिंह और उनके सांसद कांग्रेस की बातों में गुमराह हो गये। मुलायम सिंह ने कहा कि आज अगर गांधी, लोहिया, जयप्रकाश होते तो एफडीआई नहीं आता, लेकिन मैं कहती हूं कि आज अगर मुलायम वोट करते, तो एफडीआई नहीं आता।
कारण एफडीआई बनाम सीबीआई बन जाये, तो क्या होगा। आज का दिन इतिहास रचेगा। आने वाली पीढ़ी देखेगी कि कैसे उनके प्रतिनिधियों ने अपनी कथनी और करनी में कैसा फर्क दिखाया। आने वाली पीढ़ी इस बहस की रिकॉर्डिंग देखेगी तो यही कहेगी कि हमारे सांसदों ने कहा कुछ और किया कुछ और।
अब अगर मायावती की बात करें तो अगर एससी-एसटी के रिजर्वेशन की बात आती है, तो वो संसद तक चलकर आती हैं और कहती हैं कि भाई-बहन मिलकर वोट करेंगे, लेकिन आज न बहन हैं न भाई।
सुषमा ने कहा, "तारीख की आंखों ने वो हाल भी देखा है, लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा भेगी... मैं अपील करना चाहती हूं कि 20 करोड़ लोगों के बारे में सोच कर बटन दबायें।"












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