'फेसबुक ने बढ़ा दिये टेंशन के मरीज'
रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि अक्सर लोग अपनी लोकप्रियता से फलीभूत होकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को एड कर लेते हैं। और जब दायारा अधिक बढ़ जाता है तो लोग अपमानित भी ज्यादा ही होते हैं और जिन लोगों के फेसबुक लिस्ट में दोस्तों के अलावा पारिवारिक लोग होते हैं उनके पास तनाव ज्यादा होता है। अक्सर लोगों के बीच तब परेशानी देखी जाती है जब किसी का दोस्त आपत्तिजनक फोटो, गाली-गलौज,शराब से जुड़े विज्ञापन जैसी बातें पोस्ट कर देता है,ऐसे में रिश्ते बनने के बजाय बिगड़ जाते हैं।
इस रिपोर्ट में खास बात यह है कि इसमे वो लोग ज्यादा होते हैं जिनके फ्रेंडलिस्ट में नये दोस्तों के अलावा पुराने दोस्त होते हैं जिनसे पुराने राज खुलने की संभावना ज्यादा होती है और अतित का असल वर्तमान पर पड़ता है।
इसके अलावा मां-बाप का फ्रेंड लिस्ट में शामिल होना बच्चों के लिए मुसीबत का सबब बन जता है जिससे बच्चों का लगता है कि उनकी स्वतंत्रता पर निगरानी रखी जा रही है जो कि टेंशन का मुख्य कारण होता है। फेसबुक पर करीब 300 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इन लोगों की औसत उम्र 21 वर्ष थी।













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