सौ एकड़ जमीन के लिए आपस में भिड़े ईश्वर के पुजारी

मठ हाटा से चार किलोमीटर करमहा के नाम से प्रसिद्ध है। तीन वर्ष पूर्व मठ से चोरी गयी मूर्तियों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है। सूत्रों के अनुसार चोरी में मठ के ही कुछ लोगों का हाथ था। नाथ सम्प्रदाय के इस मठ की दो अन्य शाखाएं बंचरा एवं मगरुआ में हैं और तीनों शाखाओं को मिलाकर लगभग एक सौ एकड़ भूमि है। जो मठ के नाम दर्ज है। करमहा मठ में पहले बाबा दुखीनाथ महंत हुआ करते थे और उनकी मृत्यु के बाद शिष्य हंसनाथ ने गद्दी संभाली। बाद में इनके दो शिष्य मथुरा नाथ व रक्षा नाथ भी महंत बने जो काफी प्रसिद्ध हुए। इसके बाद महाबीर नाथ ने गद्दी सम्भाली और जीवन के अन्तिम समय अवध बिहारी पाण्डेय को मठ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
इस बीच मध्य प्रदेश के बद्रीनाथ नाम का एक साधु मठ में आकर रहने लगा। महाबीर नाथ की मृत्यु के बाद अवध बिहारी पाण्डेय और बद्रीनाथ के बीच उत्तराधिकार का विवाद हो गया। कुछ दिनों बाद बद्रीनाथ की हत्या हो गयी। इसके बाद 1992 में अवध बिहारी पाण्डेय की भी हत्या हो गयी। अवध बिहारी पाण्डेय ने अपना उत्तराधिकारी नामित नहीं किया था यही कारण था मठ के उत्तराधिकार के लिए कई लोग आमने- सामने आ गये। फिलहाल ग्राम प्रधान बाबूलाल ङ्क्षसह की सूचना के बाद प्रशासन ने तहसीलदार हाटा को मठ का देखरेख करने वाला नियुक्त किया है। कई दावेदारों के होने के कारण मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय चला गया।












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