विजय माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट

कोर्ट ने यह फैसला एक केस की सुनवाई के दौरान जारी किया जिसमें जीएमआर हैदराबाद इन्टरनेशनल एयरपोर्ट ( जीएचएआईएल) ने किंगफिशर के खिलाफ 10.3 करोड़ के चेक बाउंस होने का केस दर्ज करवाया था। जीएचएआईएल राजीवगांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की प्रवंधनकर्ता कंपनी है।
सूत्रों के अनुसार विमानों की पार्किंग, लैंडिंग और रखरखाव के किराये के रूप में जारी किये गये चेक बाउंस हो गये थे और इसकी समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है। इसके पहले मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी जीवीके ग्रुप ने जून 2012 में किंगफिशर के खिलाफ चेक बाउंस होने का केस दायर किया था। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डीआईएएल) की प्रबंधन कंपनी जीएमआर ने भी तीन करोड़ रूपये के चेक के बाउंस होने का केस किंगफिशर के खिलाफ दायर किया था।
किंगफिशर एयरलाइन्स घाटे में चल रही है। वर्ष की दूसरी तिमाही 30 जून 2012 तक कंपनी को 651 करोड़ रूपये का घाटा हुआ था। पिछले दिनों वेतन न मिलने के कारण किंगफिशर के इंजीनियरों, पाइलेटों ने भी हड़ताल कर दी थी। जिसके कारण उड़ानों को रद्द कर दिया गया था। कंपनी ने हड़ताल पर गये कर्मचारियों से बात कर काम पर वापस आने की गुजारिश की थी लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। ऐसे में चेक बाउंस होने के बाद माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होना, उनके घावों पर नमक छिड़कने जैसी बात है।












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