मोदी के गुजरात में झंडा फहराना चाहती है सपा

सपा ने गुजरात में 2007 में हुये विधानसभा तथा 2009 में हुये लोकसभा चुनाव में भी प्रत्याशी उतारा था लेकिन उसे किसी सीट पर सफलता नहीं मिली थी। अब पार्टी नये जोश के साथ एक बार मोदी के सामना करने की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो गुजरात की 80 सीटों पर चुनाव में सपा कुछ अन्य दलों के बड़े नेताओं को भी प्रत्याशी बना सकती है। वहीं पार्टी कुछ धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ सीटों का तालमेल और समझौता भी करेगी।
सपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि गुजरात में चुनाव जीतना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि वहां के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे सा प्रदायिक ताकत को चुनौती देना। पार्टी का दावा है कि 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पूरे देश में मुस्लिम सपा के पक्ष में मतदान करेंगे।
वहीं पार्टी के यह भी उम्मीद है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में मिले वोट से पार्टी को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता मिल सकती है, शायद इसीलिये सपा गुजरात में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लडऩा और वोट पाना चाहती है। चूंकि गुजरात के सौराष्ट्र, पंचमहल, बांसकांठा, गोधरा और साबरकांठा जैसे इलाके मुस्लिम बाहुल्य हैं इसलिए सपा इन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करेगी। पार्टी के नेताओं ने चुनाव की तारीख की घोषणा होने के पहले से ही राज्य के सभी 25 जिलों का दौरा शुरू कर दिया है।
वहीं राजनीति जानकारों की मानें तो सपा को काफी हद तक यहां फायदा मिल सकता है क्योंकि आदिवासी, अन्य पिछडा वर्ग और मुस्लिम पहले से ही नरेन्द्र मोदी के खिलाफ हैं इस कारण सपा इन समुदाय में अपनी पैठ बना सकती है। प्रदेश में सपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव में यदि श्री मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में आ गये तो वह लोकसभा के आगामी चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे, लिहाजा पार्टी का लक्ष्य श्री मोदी को गुजरात में जीतने से रोकना है।












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