यूपीए के लिये गणित भिड़ाने में जुटी सपा

गौरतलब है कि बुधवार की सुबह पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि गुरुवार को होने वाली जिस संसदीय बोर्ड की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा लेकिन शाम होते-होते संसदीय दल की बैठक भी टल गई। ऐसा क्यों हुआ इस बारे में तो पार्टी नेता कुछ नहीं कर लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी कल के बंद के बाद अपना रूख स्पष्टï करेगी। हालांकि पार्टी नेता यह जरूर कह रहे हैं कि वह सपा केन्द्र सरकार में किसी भी कीमत में शामिल नहीं होगी लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी में केन्द्र को समर्थन दिए जाने के मामले में हलचल है।
मुलायम व रामगोपाल यादव ने की बैठक
सपा मुखिया मुलायम सिंह और पार्टी महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव केन्द्र में बदले राजनीति समीकरणों को लेकर करीब डेढ़ घंटे तक विचार विमर्श किया। लम्बी वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने यह निर्णय लिया कि जब तक ममता-कांग्रेस के बीच बनते-बिगड़ते संबंध अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच जाते, तब तक पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में इस प्रकरण पर कोई निर्णय लेना बेमानी होगा। नेताओं का कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार कोई निर्णय लेना जल्दबाजी होगा। प्रो. रामगोपाल यादव ने कह भी दिया कि फिलहाल अभी कोई संसदीय बोर्ड की बैठक नहीं होगी।
बसपा व अन्य दलों पर भी सपा की नजर
सपा के वरिष्ठï नेता प्रो. रामगोपाल का कहना है कि केंद्र सरकार का समर्थन गुण-दोष के आधार पर किया गया है यदि केन्द्र सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों की उपेक्षा करती रहेगी तो समाजवादी पार्टी के पास भी विरोध के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचेगा। श्री यादव ने कहा केन्द्र सरकार सहयोगियों की वैशाखी पर टिकी हुई है जबकि उसका व्यवहार ऐसा है कि माने वह दो-तिहाई बहुमत की सरकार हो। उधर सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस के गलत फैसलों के चलते आम आदमी बहुत प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस अडिय़ल रुख से नुकसान उसे ही होगा।
कांग्रेस हमारे लिए रोल मॉडल नहीं: प्रो. रामगोपाल
कांग्रेस की सरकार वाले राज्यों ने सिलेण्डरों की संख्या 6 की बजाय 9 कर लोगों को कुछ राहत दी है। इस पर रामगोपाल यादव ने कहा कि कांग्रेस सपा के लिए रोल माडल नहीं है जो उसके द्वारा उठाए कदमों का सपा अनुसरण करे। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने एक ओर यह जरूर कहा कि वे केन्द्र सरकार में शामिल नहीं होने जा रहे हैं लेकिन अगले ही पल उन्होंने यह कहा दिया राजनीति में किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सपा चाहती है कि जनता के बीच यह सन्देश न जाए कि जब जनविरोधी फैसले लिए जा रहे थे तब पार्टी खामोश थी, लेकिन वह इतना भी मुखर नहीं होना चाहती है कि सरकार गिर जाए और धर्म-निरपेक्ष सरकार गिराने का ठीकरा उसके सिर फोड़ा जाए।












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