'भारत में कार्टूनिस्ट को जेल और कार्टून को संसद मिलती है'
असीम के साथ हुए बर्ताव का विरोध टीम अन्ना के अहम सदस्य कुमार विश्वास ने भी किया है। मशहूर कवि और लोकपाल आंदोलन के मुख्य सिपाही कुमार विश्वास ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है, "कुछ लोगों का कहना कि असीम के कार्टून सीमा में नहीं हैं ! हो सकता है न हो, किन्तु मेरा आक्रोश इस बात पर था, है और रहेगा कि ये चोरों और डकैतों से विभूषित सरकार कौन होती है तय करने वाली कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई राष्ट्रवादी-कलाकार क्या और किस सीमा में रचेगा ? दरअसल "सरकार" खुद को "देश" समझती है, इसीलिए "सरकार-विरोध" को "देश-द्रोह" कहती है ! तमिलनाडु के चुनावों के दौरान कांग्रेस का यह बड़ा पोस्टर क्या देश-द्रोह नहीं!"
उन्होंने आगे लिखा, "अगर जानवरों को बोलना आता तो निश्चित ही अपने मुख की जगह गधों और वफादार कुतों का चित्र देख कर मानहानि का दावा कर देते ! आजकल सुविधा के बिल में घुसे अनेक "चर्चा-चक्रवर्ती" साहित्यकार, जो सरकार की निर्लज्ज-कृपाओं से विभूषित हैं, हम विद्रोही-स्वरों को "अराजक" कह-कह कर गरियाने में तल्लीन हैं ! मुझे गर्व है कि चाहे मैं आम-जनता के श्रमशील चंदे से इकठ्ठा किया हुआ मानदेय लेता हूँ, कम से कम सरकारी अनुदान के टुकड़ों पर "चमचा-राग" तो नहीं गाता ! शायद इसीलिए मैं जनता का दर्द चिल्लाता हूँ, सिर्फ फेसबुक पर प्रवचन और निंदा-रत नहीं हूँ ! इस दर्द को गाने,चिलाने के लिए कविता तो छोड़िये ,गली-गली बाबा कबीर कि तरह हांका भी लगाना पड़े तो लगाऊंगा ! तुम धरो अपनी आकादमी,सम्मान, पद्मश्री और साहित्यिक-उत्कृष्टता के तमगे!"
अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि असीम त्रिवेदी को लेकर आम से खास लोग आक्रोशित हो गये हैं। उन्हें लगता है कि असीम के साथ जो कुछ हो रहा है वो गलत हो रहा है। कुछ महीनों पहले टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि संसद में डकैत बसते हैं जिसको लेकर काफी हाय-तौबा मची थी। केजरीवाल को सामूहिक रूप से माफी मांगने को कहा गया था।
लेकिन अब तो देश की पूरी जनता ही सरकार के लोगों को कार्टून कह रही है इसलिए सवाल उठता है कि सरकार अब किस-किस से माफी मांगने को कहेगी। गौरतलब है कि देशद्रोह के आरोप में जेल गए विवादास्पद कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी आज दोपहर 3 बजे जेल से रिहा कर दिए जाएंगे। असीम की जमानत मंगलवार को मंजूर कर ली गई थी लेकिन उन्होंने यह कहकर बाहर आने से मना कर दिया था कि जबतक उनके ऊपर से देशद्रोह का आरोप नहीं हटेगा वह जमानत नहीं स्वीकार करेंगे लेकिन बाद में महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटील के भरोसा दिलाने पर वो जमानत लेने पर राजी हो गए।
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