पूर्वी उत्तर प्रदेश में मस्तिष्क ज्वर से दस बच्चों की मौत

दस बच्चों की मौत होने के साथ इस साल जानलेवा बीमारी से मरने वालों की संख्या 258 हो गयी है। प्रदेश सरकार व मेडिकल कालेज प्रशासन इन मौतों पर चुप्पी साधे है जबकि स्वयं सेवी संगठन इसके लिए सरकार की लापरवाही को दोषी बता रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मौतों की पुष्टि करते हुए बच्चों को बेहतर इलाज देने का दावा किया है। गोरखपुर मंडल के स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक दिवाकर प्रसाद के मुताबिक उपचार के दौरान मस्तिष्क ज्वर से गोरखपुर जिले के तीन, देवरिया व महराजगंज जिले के दो-दो और संतकबीर नगर (सिद्धार्थनगर) व बलिया जिले का एक-एक बच्चे की मौत हो गयी।
जानलेवा इस बीमारी से पिछले एक जनवरी से अब तक तकरीबन 1521 रोगियों को विभिन्न चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया जिनमें से 258 मरीजों की मृत्यु हो चुकी है। पिछले 24 घंटे के दौरान मेडिकल कालेज में 46 नये रोगियों को भर्ती किया गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या ने साबित कर दिया कि जिलों में यह बीमारी कम होने की बजाय और बढ़ती जा रही है।
इसका अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2012 में पूर्वांचल के अलावा बिहार व पड़ोसी मुल्क नेपाल के भी मरीज इलाज के लिए बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में आये। बिहार से 139 मरीज आए जिसमें से 25 की मौत हो गयी, इसी प्रकार पड़ोसी देश नेपाल के छह में से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है।
उधर बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में मंगलवार को हुए उपद्रव के बाद जूनियर डाक्टरों द्वारा काम न किये जाने से मेडिकल कालेज की स्थिति विशेषकर बाल रोग विभाग की खराब हो रही है। बच्चे मस्तिष्क ज्वर के मरीज परेशान हैं और परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में दवा आदि की सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों कहना है कि भर्ती मरीजों को इलाज में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किये जा रहे हैं।












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