13 साल की उम्र में शादी, कोर्ट ने कहा पढ़ाई करो

न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति जे.आर. मिड्ढा की खंडपीठ ने कहा कि लड़की की उम्र 13 वर्ष है। यह आयु उसकी शादी की नहीं, बल्कि पढ़ाई करने की है। अदालत ने कहा चूंकि लड़की अपने माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती इसलिए उसे निर्मल छाया में भेजा जाता है।हाईकोर्ट ने नेशनल कमीशन फॉर चाइल्ड राइट को निर्देश दिया कि वह सरकारी खर्च पर लड़की की पढ़ाई और उसके लिए एक अलग से होस्टल में रहने व खाने-पीने की व्यवस्था करे।
लड़की की काउंसलिंग करे और उसे उसके भविष्य के बारे में अच्छे व बुरे के बारे में सही से समझाए। लड़की माता-पिता के पास रहना चाहती है या नहीं। इसका फैसला काउंसलिंग के बाद फिर लड़की की राय जानने के बाद किया जाएगा।
अदालत ने युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उसे किसी भी प्रकार से लड़की या उसके माता-पिता से संपर्क न करने की हिदायत दी है। अदालत ने मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर तय की है।
इससे पूर्व खंडपीठ ने दोनों पक्षों के अभिभावकों व युवक व लड़की से अपने चैंबर में बात की। लड़की ने कहा वह अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी और उससे विवाह किया एक 20 वर्षीय युवक 3 फरवरी 2012 को आठवीं कक्षा की एक 13 वर्षीय छात्रा के साथ घर से फरार हो गया था। 5 फरवरी 2012 को उक्त प्रेमी युगल वापस लौट आया। हाईकोर्ट के समक्ष लड़की ने कहा कि वह अपनी मर्जी से युवक के साथ भागी थी और उससे विवाह किया। वह अपने परिजनों के साथ नहीं जाना चाहती।












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