अन्य की तुलना में दो साल ज्यादा जीती हैं हरियाणवी महिलाएं

राज्य सरकार द्वारा शिशुओं में हिमोग्लोबिन के स्तर को सुधारने के लिए उठाए गए कदमों बारे पूछे गए प्रश्न के जबाव में श्री राव ने कहा कि राष्ट्रय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 3 के अनुसार राज्य में 72.3 प्रतिशत शिशु अनीमिया गस्त पाए गए, जिनमें से 25.8 प्रतिशत मामले सामान्य अनीमिया, 42.2 मध्यम अनीमिया और 4.3 प्रतिशत गम्भीर अनीमिया के थे। उन्होंने कहा कि इस समस्या को गम्भीरता से लेते हुए सरकार ने शिशुओं में हिमोग्लोबिन के स्तर को सुधारने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
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उन्होंने कहा कि राज्य में इन्दिरा बाल स्वास्थ्य योजना के तहत शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सरकारी स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों के शून्य से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की अनीमिया की जांच की जाती है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2010-11 में 30.65 लाख बच्चों और वर्ष 2011-12 में 32.06 लाख बच्चों की जांच की गई। हल्के एवं मध्यम अनीमिया से ग्रस्त बच्चों को आयरन फॉलिक एसिड की गोलियां महीनेवार दी जाती है। गम्भीर अनीमिया से गस्त बच्चों की पैरिफेरल ब्लड फिल्म्स तैयार की जाती है ताकि अनीमिया के कारणों का पता लगा कर उनका ईलाज किया जा सकें।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2010-11 में 11,008 बच्चों, जिनमें गम्भीर अनीमिया पाया गया, को उपचार के लिए जिला हस्पतालों में रैफर किया गया। ऐसे बच्चों के उचित उपचार के लिए हर जिले में उचित ट्रेकिंग प्रणाली विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त, पेट के कीड़े मारने के लिए सभी बच्चों को वर्ष में दो बार दवाई दी जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2012-13 में शून्य से पांच वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आयरन फॉलिक एसिड सिरप, गोलियां एवं एलबेंडाजोल की गोलियों की खरीद के लिए 134 लाख रुपये और पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए 181.87 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया है।












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