रात भर जंगल में पड़ा रहा बच्चा, जहां घूमते हैं लकड़बग्घे

लकड़बग्घों और भेड़ियों के इलाके में रात भर पड़े रहने के बाद जब सवेरे उसके रोने की आवाज सुनाई दी तो ग्रामीणों ने बच्चे को उठाकर पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने जब नवजात की मां की तलाश शुरू की तो उसे जल्द ही कामयाबी मिली और इलाके में रहने वाले महरून्निसा से कबूल किया कि बच्चा उसी का है और गरीबी व समाज के डर से बच्चे को जंगल में फेंका था।
महिला का कहना है कि उसके पति की मौत दस वर्ष पूर्व हो चुकी है और उसके एक युवक से सम्बंध हो गए जिसके बाद इस बच्चे का जन्म हुआ। समाज के डर से उसने यह कदम उठाया।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले बख्तावर पुरवा गांव में आज सुबह एक बाग में कुछ ग्रामीणों की नजर एक रोते हुये नवजात पर पड़ी। गांव के बाहरी हिस्से से सटे जंगल के आसपास कुत्तों और जंगली जानवरों का आतंक रहता है। गांव वालों के अनुसार आम तौर पर लोग इस ओर रात के समय नहीं जाते, लेकिन किसी औरत ने अपने नवजात शिशु को इस जंगल में फेंक दिया था।
ग्रामीणों द्वारा सूचना मिलने के बाद मौके पर पंहुची पुलिस ने नवजात को कब्जे में लिया और उसे चिकित्सालय में भर्ती कराया जिसके बाद शुरू हुर्ई उसकी मां की तलाश। कुछ घंटों में नवजात की मां को तलाश पूरी हो गयी। नवजात की मां मेहरुन्निशां ने पुलिस को बताया कि गरीबी व लोकलाज के भय से वह मासूम को बाग में फेंका था।
उसका कहना है कि उसने यह सोचकर बच्चे को बाग में छोड़ा था कि कोई न कोई परिवार बच्चे को अपना लेगा। पुलिस का कहना है कि महरून्निशा मजदूरी कर दो बच्चियों के परिवार का भरण पोषण करती है और महिला के पति की मृत्यु दस वर्ष पूर्व हो चुकी है और इस दौरान उसके संबन्ध एक युवक से हो गये थे। उन्होंने बताया कि फिलहाल नवजात बालक एक बार फिर अपनी मां के आंचल में है, लेकिन मां उसे अपनाने को तैयार नहीं है। इसलिए पुलिस को अब उस जरुरतमंद की तलाश है जो बच्चे की परवरिश का जिम्मा उठा सके।












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