शिंदे ने किया राज्यों के साथ मिलकर काम करने का वादा

उन्होंने कहा कि वह भी खाई को और भरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा, हमें और आगे बढ़ना होगा। राज्यों के साथ बेहतर संबंध रखना होगा। राज्यों में दूसरे राजनीतिक दलों का शासन हो सकता है। लेकिन मैं सभी मुख्यमंत्रियों को संदेश देना चाहता हूं कि हम सब भारतीय हैं और जहां कहीं भी कठिनाई है, हम सब मिलकर काम करेंगे। मंत्री का बयान राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी केंद्र (एनसीटीसी) की स्थापना और कई मुद्दों की पृष्ठभूमि में आया है जिन पर गृह मंत्रालय को हाल के दिनों में विरोध का सामना करना पड़ा था। शिंदे ने मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को धन्यवाद दिया और कहा कि 1980 के दशक में गृह मंत्री रहे बूटा सिंह के बाद वह दूसरे दलित हैं जिन्हें यह अहम पद सौंपा गया है।
उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने बूटा सिंह को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी थी और अब सोनिया तथा सिंह ने उन्हें यह जिम्मा सौंपा है। शिंदे ने कहा, गांधी परिवार ने हमेशा पिछडी जातियों के कल्याण की ओर ध्यान दिया है। दलित भी बड़ी जिम्मेदारी ले सकते हैं। गृह मंत्रालय एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है। मैंने पहले भी बेहतर काम किया है और गृह मंत्री के रूप में मैं अपने कामकाज से फिर यह साबित करूंगा। एनसीटीसी की स्थापना की योजना के बारे में पूछे जाने पर नए गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने इस पर विचार नहीं किया है और पहले वह सरकार में अपने सहयोगियों तथा राज्यों से विचार विमर्श करेंगे। उन्होंने कहा, मैं खुले दिमाग का हूं। मुझे राज्यों से भी बातचीत करने दीजिए। मुझे सबसे बातचीत करनी और सहयोग लेना है।
यह देश राज्यों का है। नक्सल मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के प्रसार के कई कारण हैं, खासकर सामाजिक कारण और वह इससे निपटने में इन सभी कारकों पर विचार करेंगे। अन्ना हजारे और उनकी टीम के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निबटने की योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हर कोई आंदोलन के साथ है लेकिन इसे एक ढांचे के अंदर होना चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार इससे निबटेगी, सरकार इससे निबट रही है। यह सामूहिक जिम्मेदारी का मुद्दा है। आतंकवाद के मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि यह सच है कि हर स्थान पर पुलिस तैनात नहीं की जा सकती लेकिन वह शांति सुनिश्चित करने का हरसंभव प्रयास करेंगे क्योंकि उन्हें सरकार में काम करने का लंबा अनुभव है। वह पुलिस अधिकारी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। शिंदे ने तेलंगाना आंदोलन, भारतीय मछुआरों पर श्रीलंकाई बलों के हमलों, आतंकवाद से मुकाबला करने में पाकिस्तान का असहयोग जैसे मुद्दों से जुड़े सवालों का जवाब देने से परहेज किया।












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