रैगिंग के खिलाफ शिकायत करें antiragging.in पर

anti ragging
दिल्ली। भारत के समस्त शिक्षण संस्थानों में रैगिंग एक गैरकानूनी अपराध है। अगर कोई भी छात्र या छात्रा रैगिंग या उससे मिलती जुलती किसी भी गतिविधि में संलिप्त पाया गया तो उसे जेल भी हो सकती है।

देश में बढ़ रही रैगिंग के मामलों को बहुत ही गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार द्वारा एंटी रैगिंग पोर्टल की शुरुआत की गयी है। इस पोर्टल को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने लॉन्च किया है।

ज्ञात हो कि सरकार द्वारा यह कदम तब उठाया गया जब सुप्रीम कोर्ट ने इस दिशा में अपनी पहल करते हुए रैगिंग पर कठोर कदम उठाने के दिशा निर्देश दिए थे।आपको बताते चलें कि यूजीसी ने पीपीपी मॉडल के जरिये एक ऐसा एंटी रैगिंग पोर्टल शुरू किया है जो फेसबुक और ट्विटर से भी जुड़ा है। इस पोर्टल पर लॉग इन कर कोई छात्र या अभिभावक रैगिंग संबंधी अपनी शिकायत को हलफनामे के रूप में दर्ज करा सकता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई, 2009 को अपने फैसले में देश के शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए रैगिंग निरोधी कार्यक्रम पर अमल करने के लिए कहा था। जिसमें अन्य बातों के साथ शुल्क मुक्त रैगिंग निरोधी हेल्पलाइन, कॉल सेंटर बनाने से लेकर संस्थानों व छात्रों आदि का एक डाटाबेस तैयार करने के लिए कहा था।

आखिर कैसे दर्ज होगी शिकायत

1- इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी छात्र या अभिभावक अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
2- लॉगइन करने वाले छात्र को एक आईडी मिलेगी और उसके जरिए वह बाद में अपनी शिकायत की स्थिति भी जान सकता है और पता कर सकता है कि उसके मामले में क्या कार्रवाई हुई।
3- छात्र अपनी सामान्य, गंभीर तथा अति गंभीर शिकायत दर्ज करा सकता है। उसकी शिकायत फौरन संबंद्व कॉलेज या शिक्षण संस्थान को भेज दी जाएगी और गंभीर शिकायतें सीधे जिलाधीश या पुलिस प्रशासन को भेजी जाएंगी।
4- पोर्टल से देश के सभी कॉलेज जोड़ दिए गए हैं, ताकि छात्रों की शिकायत संबंधित अधिकारी के पास पहुंच जाए। पोर्टल पर डाटा बेस को और विकसित किया जाएगा।

क्या है एंटी रैगिंग पोर्टल की खासियतें

1- रैगिंग निरोधी हेल्पलाइन 18001805522 का प्रबंधन और उसके अनुसार की जाने वाली कार्रवाई एक सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जा रही है।
2- छात्र अपनी शिकायतों पर की जा रही कार्रवाई में हुई प्रगति को किसी भी समय www.antiragging.in पर देख सकते हैं।
3- छात्र ऑनलाइन रैगिंग निरोधी हलफनामे को www.antiragging.in से डाउनलोड कर सकते हैं।
4- पोर्टल पर मौजूद रहेगा डाटा बेस

आखिर क्यों अस्तित्त्व में आया ये पोर्टल

हिमाचल प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के कारण एक छात्र की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। उस छात्र के पिता ने अदालत में मुकदमा दायर किया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई 2009 को सरकार को रैगिंग रोकने के लिए कडे़ कदम उठाने को कहा था जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि रैगिंग की प्रताड़ना झेल रहे छात्रों के लिए इसमें हेल्पलाइन, कॉल सेंटर, के साथ साथ डाटाबेस भी तैयार हो।

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