राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की मुहिम शुरू
राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब दा की जीत भी लगभग तय मानी जा रही है। सच पूछिए तो प्रणब दा जैसे-जैसे रायसीना हिल्स की ओर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे राहुल गांधी का 7, रेसकोर्स तक का रास्ता साफ होता जायेगा। यानी प्रधानमंत्री बनने के आगे आने वाली अढ़चनें खत्म होती जायेंगी।
हम आपको बता दें कि कांग्रेस में मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के बाद अगर कोई आता है तो प्रणव मुखर्जी। जाहिर है जब तक प्रणब दा राजनीति की मुख्यधारा में रहते, तब तक राहुल का पीएम बनना सपने जैसा होता। अब यह सपना साकार होने के दिन आ गये हैं।
जैसा कि हमने आंकलन किया था, राजनीतिक गलियारे के समीकरण और खुसफुसाहट दोनों ही उसी दिशा में चल रहे हैं। राष्ट्रपति चुनाव खत्म होते-होते राहुल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने की बातें निकलकर बाहर आ गई हैं। यहां तक सोनिया गांधी ने भी कह दिया है कि राहुल अब बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। वहीं राहुल का कहना है कि वो वही करेंगे जो मां और पीएम अंकल कहेंगे। ऐसे में कई राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।
1. 2014 में राहुल होंगे प्रोजेक्टेड पीएम-
राहुल गांधी को पीएम के रूप में प्रोजेक्ट करना कांग्रेस के अकेले के बस की बात नहीं है। यही कारण है कि कांग्रेस अब अलग-अलग प्रदेशों की सबसे मजबूत पार्टियों को अपने साथ जोड़ रही है। सोनिया गांधी को अच्छी तरह पता है कि कांग्रेस व घटक दलों वाली बदनाम यूपीए का अपने दम पर चुनाव जीतना मुश्किल है। यही कारण है कि उसने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को अपने साथ मजबूती से जोड़ लिया है।
वहीं पश्चिम बंगाल की सबसे कद्दावर नेता ममता बनर्जी को वो किसी भी हाल में अलग नहीं होने देगी। उनके लिये कांग्रेस कुछ भी करने को तैयार है। तीसरी पार्टी है बिहार की सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड)। कांग्रेस को पता है कि बिहार में उसकी दाल नहीं गलने वाली, यही कारण है कि उसने नीतीश कुमार को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। जेडीयू ने प्रणव दा को अपना समर्थन दे दिया है, लेकिन फिलहाल 2014 के लिए कांग्रेस का साथ देने से इंकार कर रही है। लेकिन एक बात तय है कि अगर भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम के रूप में प्रोजेक्ट कर दिया तो जेडीयू एनडीए का साथ तुरंत छोड़ देगी। उस स्थिति में मां सोनिया की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होने के करीब होंगी।
इन समीकरणों के आधार पर यह बात साफ है कि अगर सपा, तृणमूल कांग्रेस और जेडीयू जैसे दल साथ रहे, तो यूपीए एक बार फिर सरकार बनायेगी।
2. 2014 के पहले ही राहुल को पीएम बनायें
कांग्रेस को अच्छी तरह पता है कि अगर राहुल 2014 में पीएम नहीं बने, तो उसके बाद कभी नहीं बनेंगे। ऐसे में एक संभावना यह भी है कि 2012 के अंत में या 2013 की शुरुआत में ही कांग्रेस मनमोहन सिंह को पीएम की कुर्सी से नीचे उतार दे और राहुल को पीएम बना दे।
यदि ऐसा होता है तो राहुल की छवि को मजबूत बनाने के लिये कांग्रेस जी तोड़ कोशिश करेगी। यदि ऐसा हुआ, तो देश में महंगाई कम करने के सारे हथकंडे अपनाये जा सकते हैं। वहीं यूपी की तरह अन्य राज्यों को भी बड़े-बड़े पैकेजों का ऐलान किया जा सकता है। साथ ही अगर तब तक जेडीयू, सपा, तृणमूल, आदि जैसे छोटे-छोटे दल अगर मजबूती से अपने-अपने राज्यों को आगे ले गये, तो उसका श्रेय राहुल को दे दिया जायेगा।
खैर यह सिर्फ हमारा आंकलन है, आपका आंकलन क्या कहता है हमें जरूर बतायें। अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।













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