दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा महिलाओं को क्यों दें हेलमेट न पहनने की छूट?

उच्च न्यायालय ने इस मामले में शीला दीक्षित सरकार से जवाब देने कहा है। उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह पिछली सीट पर बैठने वाली महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य करने के लिए मोटर वाहन नियमों में संशोधन करे।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने सामाजिक फिल्म निर्माता उल्हास पी आर की अवमानना याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया। दिल्ली सरकार को 14 दिसंबर तक नोटिस का जवाब देना है। दिल्ली मोटर वाहन नियम 1993 के तहत पगड़ी पहनने वाले सिखों के साथ ही महिलाओं को भी स्कूटर और मोटर साइकिल की सवारी करते समय हेलमेट पहनने से छूट मिली हुई है।
उल्हास ने अपनी याचिका में कहा था कि सभी लोगों, के लिए एक नियम होना चाहिए। हर साल लगभग 70 महिलाओं की मौत दुर्घटनाओं में सिर में गम्भीर चोट लगने से होती है। सरकार को दोपहिया वाहनों की पिछली सीट पर बैठने वाले सभी लोगों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर देना चाहिए।
इससे पहले सरकार ने महिलाओं को दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने से मुक्ति देने का फैसला किया था। सरकार का मानना था कि यह महिलाओं पर निर्भर है वे चाहे तो अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट लगाएं या आकर्षक दिखने के लिए चाहे तो इसे न लगाएं। कोर्ट में दिल्ली सरकार ने कहा कि वह हेलमेट संबंधित पुराने कानून में कोई परिवर्तन नहीं करेगी। यह फैसला सरकार ने इसलिए किया है क्योंकि सिख संगठनों ने अनिवार्यता को धर्म के विरुद्ध बताकर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से विरोध जताया था
यहां बता दैं दिल्ली हाईकोर्ट में एक व्यक्ति ने महिलाओं के लिए हेलमेट की अनिवार्यता लागू करने के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी। इस पर अदालत ने 25 अप्रैल तक सरकार को फैसला लेने के लिए कहा था। सिख संगठनों ने इसे धर्म के खिलाफ बताया था। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सिख संगठनों से मुलाकात के बाद परिवहन मंत्री अरविंदर सिंह लवली से मामले पर चर्चा की थी। सरकार ने कानून के जानकारों से संपर्क किया। कानून के जानकारों ने बताया कि कोर्ट ने अनिवार्यता लागू करने के लिए नहीं कहा है। यही दाव उल्टा पड़ गया। कोर्ट के आदेश को कानून के जानकार ही नहीं समझ पाए थे। नतीजा कोर्ट में दि्ल्ली सरकार की जबरदस्त फजीहत हुई।












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