यूपी में नकलचियों का साल नहीं होगा बर्बाद

यह आदेश न्यायमूर्ति रणविजय सिंह ने शिवाकांत मिश्रा और प्रेम सिंह की याचिका पर दिया है। याचिका के मुताबिक याचियों को बोर्ड की परीक्षा में अनुचित साधन का प्रयोग करते हुए पकड़ा गया था। इस आधार पर बोर्ड ने उनका अंकपत्र रोक लिया था वहीं निर्गत अंकपत्र में डब्ल्यू लिखा गया था। याचियों का कहना था कि अनुचित साधन का प्रयोग करने का आरोप अभी साबित नहीं है इस बीच उनको प्रोविजनल मार्कशीट दी जाए ताकि उसका उपयोग किया जा सके और याचियों का भविष्य प्रभावित न हो।
याचिका पर अधिवक्ता अनूप द्विवेदी और अश्विनी मिश्रा ने बहस की। न्यायालय ने याचिका निस्तारित करते हुए बोर्ड को निर्देश दिया कि इस प्रकार के सभी मामलों के निर्गत अंक पत्र पर प्रोविजनल लिखा जाए न कि डब्ल्यू। बोर्ड के इस नियम से कई छात्रों को अन्य कालेजों व निजी कोर्सों में दाखिला लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। कई बार ऐसा भी मामला सामने आया है कि किसी गल्ती से निर्दोष छात्र को भी पकड़ा गया है। अब नये नियम से बोर्ड परीक्षार्थियों को राहत मिल सकेगी।












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