गुड़गांव में खुले बोरवेल बंद करने के आदेश

जारी किए गए आदेशों में उपायुक्त द्वारा कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने 11 फरवरी, 2010 को छोटे बच्चों को खुले बोरवेलों में गिरने की दुर्घटनाओं को रोकने के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन दिशा-निर्देशों की प्रति भेजते हुए उपायुक्त ने इन पर तत्काल अमल के आदेश दिए हैं। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा सरपंचों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में खुले बोरवेलों व ट्यूबवैलों का तत्काल बन्द करवाना सुनिश्चित करें। उन्हें निर्धारित प्रफोर्मा में रिपोर्ट अगले 10 दिन के अंदर भेजने के लिए कहा गया है।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट की हिदायतें
सर्वोच्च न्यायालय की हिदायतों में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति अपनी जमीन या परिसर में बोरवेल अथवा ट्यूबवैल लगाने से 15 दिन पहले जिलाधीश, संबंधित अधिकारी तथा ग्राम पंचायत के सरपंच को सूचित करेगा। गुडग़ांव को केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा डार्क जोन घोषित किए जाने के कारण जिला प्रशासन ने यहां पर बिना उपायुक्त की पूर्व अनुमति के जिला में कहीं भी बोरवेल खोदने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
बोरवेल की खुदाई के समय वहां पर साईन बोर्ड लगाना अनिवार्य है, जिस पर ड्रिल करने वाली एजेंसी का नाम व पता लिखा होना चाहिए। इसके अलावा, खुदाई के समय उस स्थान के चारों तरफ कांटेदार तार या अन्य कोई बैरियर लगाया जाना चाहिए। यहां तक की, पंप की मरम्मत के दौरान भी बोरवेल अथवा ट्यूबवैल को खुला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
अनुमति के बिना बोरवेल एवं ट्यूबवैल लगाने पर प्रतिबंध
प्रशासन ने जिले में बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के नए बोरवेल एवं ट्यूबवैल लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब कोई भी व्यक्ति, संस्था, व्यवसायिक संगठन और सरकारी व गैर-सरकारी विभाग बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बोरवेल या ट्यूबवैल नहीं लगा सकता। पी सी मीणा ने जिले में धारा 144 लागू करने के आदेश जारी किए हैं।
केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा जिला में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए 13 अगस्त, 2011 को अधिसूचना जारी कर पूरे जिला में बोरवेल व ट्यूबवैल लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। आदेशों में पुलिस प्रशासन को पैट्रोलिंग बढाने के भी निर्देश जारी दिए गये हैं। इसी प्रकार, नगर निगम आयुक्त, हुडा प्रशासक, हरियाणा आधारभूत संरचना विकास निगम गुडग़ांव व मानेसर, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, सभी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, उप कृषि निदेशक को अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में विभिन्न टीम गठित करके इस मामले में निरंतर मॉनिटरिंग करने और कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।












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