गोमती नदी में प्रदूषण की भेंट चढ़ीं सैकड़ों मछलियां

मछलियों के मरने का कारण पानी में आक्सीजन की अचानक हुई कमी बतायी जा रही है हालांकि इस बाबत अभी रिपोर्ट आनी बाकी है। प्रदूषण विभाग ने पानी का नमूना लिया है। घाट पर मौजूद लोग तब सकते में आ गए जब उन्होंने बडी सं या में मरी हुई मछलियों को उतराते हुए देखा। देखते ही देखते वहां भीड जमा हो गई। इसी बीच मछुआरों को भी खबर लग गई और वे जाल लेकर पहुंच गए और कुछ ही देर में मछलियों को निकाल ले गए।
गोमती में बड़ी मात्रा में मछलियां क्यों मरीं, इसकी मु य वजह फिलहाल अभी सामने नहीं आ सकी लेकिन यह कहा जा रहा है कि दौलतगंज स्थित एसटीपी का बिना शोधित पानी छोड़े जाने के कारण मछलियां मरी हैं। वहीं यह भी आशंका जतायी जा रही है कि कुछ लोगों ने मछलियों को पकडऩे के लिए ही जान बूझकर कैमिकल डाल दिया हो।
जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि जब पानी में घुलित आक्सीजन की मात्रा तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो जाती है तो मछलियां मरने लगती हैं। एक माह पहले ही उन्होंने गोमती बैराज और मऊघाट पर आईटीआरसी से पानी में आक्सीजन की मात्रा की जांच करायी थी तब गऊघाट पर सात मिलीग्राम प्रति लीटर और गोमती बैराज पर छह मिलीग्राम प्रति लीटर निकली थी।
इस बीच पर्यावरण विभाग का कहना है कि मछलियों के मरने का कारण गोमती में नालों का गन्दा पानी लगता है। उन्होंने कहा कि नालों में जमा कचरा पहली बरसात के साथ गोमती में बहकर आता है। कचरे की वजह से पानी में घुला आक्सीजन कम हो जाता है और मछलियां मरने लगती हैं। उन्होंने कहा कि नालों की सफाई के लिए उन्होंने कई बार जल निगम को पत्र लिखा लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।












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