गुड़गांव में और भी 'अपना घर' तलाश रही पुलिस

जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नरेन्द्र कौर ने गुडग़ांव में चल रहे बाल-गृहों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सभी बालगृहों में मैंटीनेंस रजिस्टर, प्रवेश एवं बालगृह से बाहर जाने संबंधी जानकारी का रजिस्टर, सुपरविजन रजिस्टर, लॉगबुक और ऑर्डर बुक आदि सभी दस्तावेजों की जांच की। श्रीमती कौर ने बालगृहों में रह रहे बच्चों के साथ अलग से बात कर उनसे बालगृह से संबंधित स्थिति के बारे में पूछा।
श्रीमती कौर ने द लिटिल किंगडम, स्वाधार गृह, शान्ति भवन निकेतन, ओल्ड एज होम, उज्जवल निकेतन, दीपाश्रम, आरूषि व सिस्टर ऑफ चैरिटी नजेरथ आशा निवास का निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान आस-पड़ौस में रहने वाले लोगों से भी बालगृह के बारे में पूछताछ की। श्रीमती कौर ने कहा कि बालगृहों के लिए निर्धारित कानूनी मापदंडों के अनुसार ही वहां कार्य किया जा सकता है।
श्रीमती कौर ने कहा कि जिला गुडग़ांव में चल रहे सभी बालगृहों के वहां रह रहे सभी बच्चों का पूरा रिकार्ड होना चाहिए, जिसमें बच्चे और उसके माता-पिता के व्यक्तिगत ब्यौरे सहित उनके रहने के स्थान के बारे में पूरी जानकारी हो। कानूनी मानदंडों के बारे में जानकारी देते हुए श्रीमती कौर ने कहा कि वे हर माह बालगृहों का अपनी टीम के साथ स्वयं औचक निरीक्षण करेंगी और यदि निरीक्षण के दौरान बालगृहों में रहने वाले बच्चों के लिए किए गए प्रबंध में कोई कमी पाई गई तो उक्त बालगृह संचालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रीमती कौर ने कहा कि बाल कल्याण अधिनियम के नियमों अनुसार बालगृह चलाने वाली प्रत्येक संस्था को जिला की बाल कल्याण समिति से क्लीयरेंस लेनी अनिवार्य होती है। इसके साथ-साथ, सभी संस्थाओं को उनके यहां विजिटर रजिस्टर सहित आने-जाने वालों से संबंधित रजिस्टर भी रखना जरूरी है, जिसमें वहां रह रहे बच्चों आदि का पूरा ब्यौरा हो। ब्यौरे में बच्चों के बालगृह से बाहर जाने या अंदर आने से संबंधित पूरी जानकारी होनी चाहिए।












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