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हर दूसरी महिला को पिटते देख कैसे लोग कहते हैं सत्‍यमेव जयते?

Aamir Khan in Satyamev Jayate
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने अपने शो सत्‍यमेव जयते में घरेलू हिंसा का मुद्दा उठाया है। यह शो देश के मर्दों व उन लोगों को झकझोर देने वाला है, जिन्‍होंने घर की बेटियों, बहुओं, बहनों या मां पर अत्‍याचार किया होगा।

आंकड़े- आमिर ने सबसे पहले बताया कि भारत सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 40 प्रतिशत औरतें घर में मारपीट की शिकार होती हैं। वहीं प्‍लानिंग कमीशन की एक रिपोर्ट के अनुसार 84 प्रतिशत महिलाओं पर कभी न कभी पति और उनके घर वालों ने हाथ उठाया होता है। इस हिसाब से अगर बींच की संख्‍या लें तो 50 फीसदी महिलाएं घर में मारपीट का शिकार होती हैं।

1. स्‍नेहलता- पंद्रह साल तक अपने पति की मारपीट का शिकार हुईं स्‍नेहलता ने आखिरकार अपने पति को छोड़ दिया।

सीख- घर में चाहे पति पीटे या पति के घर वाले, उसे सहना जीवन भर के जख्‍मों को न्‍योता देना है।

2. रश्मि आनंद, दिल्‍ली में घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और बच्‍चों की काउंसिलिंग करती हैं- रश्मि खुद घरेलू हिंसा की शिकार। तैयार नहीं तो थप्‍पड़, गलती से बहस की तो थप्‍पड़, तीन महीने की प्रगनेंट थीं तब सीढि़यों से धक्‍का दिया, बच्‍चे की मौत हो गई। हर साल कोई न कोई हड्डी टूटती। रश्मि ने बताया कि जब उन्‍होंने अपने पति को छोड़ दिया तो उनके पति ने उनके चरित्र पर उंगलियां उठाईं। उन्‍हें बदनाम करने की कोशिशें कीं।

सीख- पहली बार थप्‍पड़ पड़े तो तुरंत लोगों को बतायें। बदनामी की चिंता मत करें। क्‍योंकि पहली बार अगर आप नहीं बोलीं, तो आगे उसकी हिम्‍मत और बढ़ेगी।

3. कमला भसीन, समाजसेवी- हमारे देश में पति शब्‍द ही गलत है। पति यानी मालिक। यही कारण है कि पुरुष खुद को अपनी पत्नियों का मालिक समझते हैं। पितृ सत्‍तात्‍मक समाज में मर्द खुद की कमजोरी बर्दाश्‍त नहीं करते। मर्द खुद को सुपीरियर समझता है। दोष मर्दों का नहीं बल्कि उनकी सोच का है।

अहम बातें- मिडिल क्‍लास में सबसे ज्‍यादा घरेलू हिंसा होती है। इससे नीचे महिलाएं चिल्‍ला कर लोगों को बता देती हैं और ऊपर महिलाएं काले चश्‍में के पीछे आंसुओं को छिपा लेती हैं।

- मर्द कहते हैं कि वो पैसा कमाकर लाते हैं। लेकिन बच्‍चे पैसे नहीं खाते। बीवी ही उस पैसे का खाना बनाती है। बीवी ही आपकी सेवा करके आपको दूसरे दिन काम पर जाने लायक बनाती है।

- औरत मर्दों से पांच से छह घंटे ज्‍यादा काम करती हैं। अगर ऐसे में पुरुष यह कहते हैं कि वो थके हुए हैं, तो गलत हैं।

- जब तक घरों में बराबरी नहीं होगी, तब तक सच्‍ची मोहब्‍बत नहीं होगी। पति को बाहर करो, जीवन साथी को अंदर लाओ। ऐसे में आपके बेटे दानव नहीं मानव बनेंगे और बेटियां दासियां नहीं बराबर से जीयेंगी।

4. बी सतीश बालन, पुलिस अधीक्षक- देश में कोई भी महिला देश के प्रोटेक्‍शन आफ विमेन कानून का इस्‍तेमाल कर सकती हैं। इस कानून के तहत आपको हिंसा के बाद घर से बाहर नहीं निकाल सकता। पीडि़त महिला अपनी शिकायत लेकर सीधे सिटी जुडीशियल मजिस्‍ट्रेट के पास जा सकती है। बिना किसी वकील के आप सीधे जा सकती हैं। या फिर आप प्रोटेक्‍शन आफीसर के पास जा सकती हैं।

कानून कहता है कि पति मुझे घर से नहीं निकाल सकता, लेकिन अगर घर में जीना मुश्किल हो तो? तो आप सरकार द्वारा बनाये गये शेल्‍टर होम्‍स में जा सकती हैं।

- हिंसा होने पर सबसे पहले महिला अपने परिवार के पास जाती है, उसके बाद वो पंचायत तक जाती है, जब कहीं न्‍याय नहीं मिलता तब वो पुलिस के पास जाती है।

5. शन्‍नो, ड्राइवर: दरवाजा खोलने में दो मिनट लग गये तो पति ने मुझे इतना मारा कि पूरा मोहल्‍ला इकठ्ठा हो गया। एक डर बैठ गया कि जब शौहर आयेंगे तो घर में हिंसा होगी। मैं गरीब घर से जरूर थी, लेकिन बड़े लाड़ प्‍यार से पाली गई थी। एक दिन पति ने बड़ा सा पत्‍थर उठाकर मेरे सर पर मार दिया। उस दिन पता नहीं खुदा ने कहां से इतनी हिम्‍मत दी, कि मैंने एक जमाकर थप्‍पड़ दिया और कहा, हुआ दर्द, ऐसे मुझे भी होता है।

शादी के पहले मेरा सर नेम मेरे वालिद के नाम से था, शादी के बाद पति के नाम से और अब मेरे प्रोफेशन का नाम मेरे नाम के आगे जुड़ा है। आजाद फाउंडेशन से जुड़ने के बाद शन्‍नो ने दिल्‍ली पुलिस से सेल्‍फ डिफेंस सीखा।

मर्दानगी की परिभाषा-

शो के अंत में देश की महिलाओं से अपील की गई कि वो पतियों की हिंसा न सहें। आवाज़ उठायें, इससे उनका जीवन खराब नहीं बल्कि अच्‍छा होगा। वहीं पुरुषों से सवाल किया गया कि वो क्‍या चाहते हैं अपनी पत्‍नी को मार-पीट कर घर में बच्‍चों को आतंकित करना या फिर घर में प्रेम बरसाकर हर सदस्‍य से प्रेम प्राप्‍त करना। मर्द खुद निर्णय लें कि क्‍या उनके लिए मर्दानगी की परिभाषा- पत्नियों को पीटना, बच्‍चों को डरा धमका कर रखना, गालीगलौज करना?

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