छात्रों की फीस के 1 हजार करोड़ डकार गई माया सरकार

विधानसभा में शून्य प्रहर के दौरान औचित्य का मामला उठाते हुए भाजपा विधानमण्डल दल के नेता हुकुम सिंह ने मामले की जांच के लिए सदन की समिति गठित करने की मांग की। हुकुम सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं की फीस की प्रतिपूर्ति के लिए वर्ष 2010-11 में स्वीकृत 1045 करोड़ रुपये डकार लिए गये। फीस की प्रतिपूर्ति जमा न होने की वजह से छात्रों को प्रवेशपत्र नहीं मिल पा रहा है। कहीं पर परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हो रहा है। यह गंभीर मामला है इसलिए इसकी जांच के लिए सदन की समिति गठित की जाये। उनका कहना था कि समिति इस बात की जांच करे कि प्रतिपूर्ति के लिए स्वीकृत बजट आखिर गया कहां।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ युवाओं ने इसी वजह से आत्महत्या कर ली। संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कहा कि अब तक की व्यवस्था के मुताबिक पहले राजकीय कालेजों, उसके बाद वित्तीय सहायता प्राप्त कालेजों और अन्त में निजी कालेजों के छात्रों की फीस की प्रतिपूर्ति की जाती रही है। आजम खां ने कहा कि पैसा कहां गया यह जांच का विषय है। इसकी जांच करायी जायेगी।
गौरतलब है कि मायावती सरकार के कार्यकाल में जिला योजना समितियों के लिए स्वीकृत नौ हजार करोड़ रुपये का मामला उठाया था। आरोपों की सरकार ने जांच कराने का आश्वासन दिया था। इससे पहले मुख्यमंत्री ने स्मारकों और पार्कों के निर्माण में 40 हजार करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप बसपा सरकार पर लगाया था। एनआरएचएम घोटाला सुर्खियों में है। एनआरएचएम घोटाले में नेता, अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार जेलों में हैं, इसकी जांच अभी भी चल रही है।












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