दबाई जा रही है दवा घोटाले की फाइल

ज्ञात हो कि मामले की जांच पूर्र्व विशेष सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मणि शंकर मिश्रा को दी गई है सरकार बदलने के बाद जांच का कुछ अता पता ही नहीं। उल्लेखनीय है कि जांच अधिकारी श्री मिश्रा पर भ्रष्टाचार के आरोप एटा के भ्रष्टाचार निवारण समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र गिरी पहले ही लगा चुके हैं। शिकायकर्ता ने तत्कालीन व वर्तमान स्वास्थ्य महानिदेशक पर चहेती फर्म से दवा खरीद करने पर करोड़ों रुपए घूस लिए जाने का भी आरोप लगाया है।
ऐसा तब है जबकि प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने आदेश दिया था कि एकल टेंडर प्रक्रिया में दवाओं की खरीद न की जाए। सभी दवाओं को खरीद नए दर अनुबंध से की जाए। स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक डा. एसपी राम व डा. आरबी सिंह ने नोएडा की दवा कंपनी यूनीक्योर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से करोड़ों रुपए की दवा खरीद की थी। वह भी बगैर टेंडर कराए। आरोप है कि अधिकारियों पर इसके एवज में दवा कंपनी से 40 प्रतिशत का सीधा कमीशन लिया था।
हालांकि कुछ मामलों में डा. एसपी राम सीबीआई की गिरफ्त में हैं लेकिन उपरोक्त मामले पर विभागीय अधिकारी कोर्ई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। मामले की शिकायत सितम्बर माह में शासन को लिखित तौर पर दी गई। शासन ने जांच के आदेश दिए थे। विशेष सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मणि शंकर मिश्रा को जांच अधिकारी बनाया गया था। जिन्होंने जांच के बजाय मामले को ही दबा दिया।
जिन दवाओं की खरीद की गई थी उसमें फोलिक एसिड, विटामिन, क्लोरीमेजॉल, बोरिस एसिड, सल्फर, कैप्सूल डीजॉल सहित कई अन्य दवाओं की खरीद एकल प्रणाली से की गई। जबकि प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संजय अग्रवाल ने आदेश दिया था कि टेंडर संख्या 574 में एकल प्रणाली से दवाओं की खरीद न की जाए। सभी दवाएं नए अनुबंध संख्या 575 से की जाए। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. एसपी राम को दवाओं की इस खरीद प्रक्रिया को निरस्त करना था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया था। स्वास्थ्य भवन के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच चल रही है और जिन्होंने गड़बड़ी की है वह पकड़े जाएंगे।












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