अखिलेश ने दो महीने में बदल दी यूपी की फिज़ा

युवा मुख्यमंत्री के दो महीने पूरे होने पर वनइंडिया ने यूपी के लोगों से बात की और उनसे उनकी राय जाननी चाही- जवाब सकारात्मक और नकारात्मक दोनों मिले।
डा. आलोक चांटिया , अध्यक्ष, अखिल भारतीय अधिकार संगठन एवं शिक्षक श्री जयनारायण पीजी कॉलेज- मुझे सबसे बड़ा परिवर्तन यह दिखाई दिया है कि मुख्यमंत्री बोलने से ज्यादा करने पर विश्वास रखते हैं। वो बड़ी-बड़ी योजनाओं के साथ-साथ छोटी-छोटी समस्याओं को भी हल करते जा रहे हैं। लोग कहते हैं कि गुंडा-गर्दी बढ़ रही है, लेकिन सच पूछिए तो गुंडा-गर्दी के पीछे अराजक तत्वों को अखिलेश यादव किसी भी हालत में बख्श नहीं रहे हैं। मुझे सबसे बड़ा परिवर्तन लखनऊ विकास प्राधिकरण के ऑफिस में दिखा जो रिश्वतखोरी के लिए फेमस है, लेकिन पिछले सप्ताह मैं अपने काम के लिए गया और बिना पैसा दिये काम हो गया। इससे मुझे लगा कहीं न कहीं परिवर्तन जरूर आया है। रही बात छात्रसंघ चुनाव की तो इस बार चुनाव पहले की तरह नहीं होंगे। इस बार लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर होंगे और उससे कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में सुधार जरूर देखने को मिलेगा।
शबाहत हुसैन विजेता, संपादक, अवधनामा- यह जरूर है कि यूपी की फिज़ा में परिवर्तन आया है, क्योंकि पहले मुख्यमंत्री से आम लोग तो दूर सांसद विधायक तक नहीं मिल पाते थे, वहीं आज सीएम आम जनता से मिल रहे हैं। तब अधिकारी सिर्फ मुख्यमंत्री की सुनते थे, आज जनता सीएम के साथ-साथ जनता की भी सुनते हैं। यह सिर्फ इसलिए हुआ है क्योंकि खुद मुख्यमंत्री जनता के करीब हैं। यही नहीं जनता भी उन्हें अपने करीब पा रही है। आम आदमी को लगने लगा है कि ये मेरी सरकार है। हमें कुछ कहना होगा तो सीएम से मिल लेंगे। सालों से बंद पड़ा जनता दरबार खुल गया है। जनता को पता है कि अगर मुसीबतें आयीं तो हम सीधे सीएम से मिल सकेंगे। हां कुछ जगहों पर हवा उलटी दिशा में बह रही है और वो है कानून व्यवस्था। इसका आंकलन दो महीनों में करना जल्दबाजी होगा।
शिया इण्टर कालेज के शिक्षक तालिब जैदी- मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में प्रदेश की तस्वीर में कुछ परिवर्तन अवश्य होगा। पिछली सरकार में जिस प्रकार ऊंचे पदों पर बैठे लोग ही लाभ कमा रहे थे अब वैसा नहीं है। सपा सरकार की वर्तमान कार्यशैली को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आम आदमी को आने वाले समय में अवश्य कुछ मिलेगा।
शक्ति सिंह, मुख्य अभियंता लेसा- बतौर सरकारी कर्मचारी मुझे इस बात का अहसास हो रहा है कि सरकार हमारे हितों में काम कर रही है। और अगर कर्मचारी खुश हैं तो समझ लीजिये सरकार सही दिशा में जा रही है। हां सरकार फिलहाल कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मात खा रही है। यदि वह काननू व्यवस्था को दुरस्त कर ले तो आने वाले समय में बेहतर परिणाम देखने को मिलेगी। पिछली सरकार के शासनकाल में भी कार्य किया लेकिन वर्तमान सरकार के समय में कार्य काफी सहूलियत व आसानी से हो रहे हैं।
दानिश सिद्दीकी, प्रदेश सचिव यूथ वेलफेयर सोसाइटी- युवाओं में जोश दिख रहा है, लेकिन अधिकारियों में अभी भी बसपामय रवैया है। अधिकारी अभी भी पिछले पांच सालों की कार्यशैली पर काम कर रहे हैं। युवाओं की बात करें तो वे आशा भरी निगाहों से सीएम की तरफ देख रहे हैं। दो महीनों में बड़े परिवर्तन तो संभव नहीं हैं, लेकिन हां उम्मीद की कई किरणें जरूर जगी हैं और हमें पूरा विश्वास है कि वो किरणें प्रदेश को प्रकाशमय कर देंगी।
सतीश कुमार वर्मा, व्यापारी- राज्य में सपा की सरकार बनने के बाद लोगों को वह लाभ नहीं मिला जिसकी लोग उम्मीद जता रहे थे। पिछली बसपा सरकार के कार्यकाल में जनता त्रस्त थी क्योंकि आम आदमी के हित वाली ऐसी कोई भी योजना नहीं बनी जिसका लाभ सीधे तौर पर लोगों को मिलता। ऐसे में लोगों ने सत्ता परिवर्तन का निर्णय लिया। लोगों को उम्मीद थी कि बसपा के विकल्प के रूप में सपा को चुना जा सकता है, लेकिन फिलहाल दो महीने में कुछ ऐसा नहीं दिखा जो उम्मीद की किरण जगा सके। दो महीने में सरकार का आंकलन करना तो जल्दबाजी होगी, लेकिन हां अगर सरकार बच्चों की पढ़ाई से लेकर सब्जियां व अनाज तक के बढ़ते दामों को कंट्रोल करे तो बेहतर होगा।
अवधेश कुमार वर्मा, वर्ल्ड एनर्जी काउंसिल के सदस्य- प्रदेश में सरकार तो बदल गयी लेकिन आम जनता कोई राहत नहीं मिली। सरकार के पास आम आदमी के लिए कोई योजना नहीं है, जिससे वह उनके जीवन स्तर में किसी प्रकार का सुधार कर सके। मंहगाई की मार आम आदमी तो झेल ही रहा था उस पर राज्य में अपराध बढऩे से जनता सहमी हुई है।
हर्षित, पीएचडी छात्र- समाजवादी पार्टी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अभी तक ऐसी योजना नहीं लायी, जिससे गरीब व असहाय लोगों को कुछ मदद मिल पाती। आम आदमी के बच्चों के लिए शिक्षा आज भी बहुत मंहगी है यदि सरकार को लोगों का भला करना हो तो उसे शिक्षा सस्ती व सुलभ करनी होगी तभी प्रदेश में शिक्षा का प्रतिशत बढ़ेगा। सिर्फ स्कूल कालेज खोल देने से शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होगा क्योंकि स्कूलों की पढ़ाई इतनी मंहगी है कि निम्र वर्ग के लोग अपने बच्चों को औसत दर्जे के स्कूल में भी नहीं पढ़ा सकते। सरकार शिक्षा के लिए धन मुहैया कराने की बात तो कर रही है लेकिन क्या वह धन आम जनता तक पहुंच सकेगा यह सोचने वाली बात है।












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