रिशांग कीशिंग पर रिझ गई संसद

उन्होंने आजादी के बाद देश के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों से निपटने का जिक्र किया था। हमने चुनौतियों से निपटने की शपथ ली। आज जिस प्रकार से विधायी कार्यों में लोग अड़चन डालते हैं उस समय वैसा नहीं था। लोग व्यवधान कम डालते थे। तब कोई मंत्री, सदस्य यदि बोल रहा होता था, तो कोई भी उसे डिस्टर्ब नहीं करता था। सभी ध्यान से उसकी बात सुनते थे। उसके बाद अपनी बात कहते थे।
बड़ा नेता हो या छोटा, सभी एक-दूसरे को सम्मान देते थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों को तरजीह देते थे। यही कारण है कि पहली लोकसभा की रिकॉर्ड 677 बैठकें हुईं। आज छोटे-बड़े नेता संसद में बच्चों की तरह झगड़ते हैं। तब ऐसा नहीं था। इसलिए आज हंगामे को देखकर संसद में कभी-कभी मन नहीं लगता है। अब मैं राज्यसभा में हूं, पर वहां भी वही हाल है।
उन्होंने कहा, तब संसद में 489 सीटें थीं, पर लोकसभा क्षेत्र 401 ही थे। 86 क्षेत्र दो सीटों वाले तथा एक क्षेत्र तीन सीट वाला था। मैं तब मणिपुर की आउटर सीट से सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर आया था। पार्टी 12 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही। कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 364 सीटें जीतीं, जबकि 16 सीटों के साथ सीपीआई दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस का एकछत्र राज था। विपक्ष की उपस्थिति नगण्य थी।
हीरक जयंती पर राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने पहली लोकसभा के तीन अन्य सांसदों को सम्मानित किया। हालांकि, किसी वजह से समारोह में हिस्सा नहीं ले पाने के कारण केएस तिलक को सम्मानित नहीं किया जा सका। सम्मानित होने वालों में मणिपुर से रिशांग कीशिंग के अलावे छत्तीसगढ़ के रेशम लाल जांगिड़, आंध्र प्रदेश के कंडाला सुब्रमण्यम और के. मोहन राव शामिल हैं।
जांगिड़ तीन बार लोकसभा सांसद रहने के अलावा तीन बार विधायक भी रहे हैं। कीशिंग ने मुख्य मंच के नीचे आकर सम्मान ग्रहण किया, लेकिन बाकी तीनों बुजुर्गो को सम्मान देने के लिए राष्ट्रपति खुद उनकी सीट तक गई। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने चारों सांसदों को स्मृति चिन्ह दिए, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पुष्पहारों से उनका स्वागत किया। उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने सभी को शाल उढ़ाकर व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने सम्मान पत्र प्रदान किए।












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