लादेन की मौत और पाक सरकार का सच

Osama Bin Laden
इस्‍लामाबाद। दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की मौत को आज (बुधवार) एक साल पूरे हो गये है, लेकिन आज भी उसकी यादे लोगो के दिलों में ताजा है। कोई उसकी भयावह याद रखता है, तो कोई आतंकवादी के रूप में। कुछ खास लोग मधुर पल को संजोए हुए है, तो पाकिस्‍तान की जनता और सरकार हमेशा से ही समर्थक के रूप में नजर आती है।

अब आपको कुछ मुख्‍य घटनाक्रम के बारे में बताते है, जिससे प्रमाणित होता है कि पाकिस्‍तान के लोग और सरकार दोनों हमेशा से ही लादेन के समर्थन में रहे हैं।

लादेन की सूचना देने वाले डॉक्‍टर का शोषण

ऐबटाबाद में लादेन के पड़ोसी रहे डॉ शकील अहमद लगातार पाकिस्‍तान सरकार और जनता के आंखो की किरकिरी बने हुए हैं, उसका कारण यह है क‍ि उन्‍होंने दुनिया में आतंक फैलाने वाले लादेन की खिलाफ अमेरिकी सरकार का साथ दिया था। उन्‍होंने टीकाकरण अभियान चलाकर ऐबटाबाद वाली हवेली में लादेन के होने की खबर अमेरिका को दी थी, जिसके बाद पाक सरकार ने उसको नौकरी से निकाल दिया और गिरफ्तार कर लिया गया।

डॉ शकील के ऊपर नियमों और सेवा शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। ये तो सरकार ने किया और पाकिस्‍तान की जनता ने उसको लगभग 'गद्दार' ही करार दे दिया। पाकिस्‍तान की जनता उसको गद्दार मानती है, और कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रही है।लोगो का कहना है कि डॉ ने अमेरिका की नागरिकता हासिल करने के लिए और चंद पैसों के लिए अपने देश से सौदा किया।

गौरतलब है कि डॉ शकील ने ऐबटाबाद शहर में टीकाकरण अभियान के जरिए लादेन के खून नमूने हासिल किए थे। जिसके बाद अमेरिकी सरकार ने इस बात की पुष्टि कर ली थी कि ओसामा बिन लादेन ऐबटाबाद के अपने घर में मौजूद है।

अमेरिकी आपेरशन के बाद छाई रही पाक सरकार की चुप्‍पी

अमेरिका के सील कमांडो द्वारा चलाये गये आपरेशन के दौरान 1-2 मई की रात ऐबटाबाद के अपने घर में अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत हो गयी थी, लेकिन पाकिस्‍तान सरकार यह बताने से कहरा रही थी कि 1-2 मई की रात ऐबटाबाद में क्‍या हुआ था।

अखबार डॉन के मुताबित पाक सरकार 2 मई की रात लादेन की मौत का सच छिपाना चाहती थी, शायद इसी कारण वह कुछ भी बोलने से कतरा रही थी। उसके बाद भी कई ऐसे तथ्‍य आये जिसमें पाकिस्‍तान सरकार का सच निकलकर सामने आया।

पाक पीएम ओसामा की हत्‍या के जिम्‍मेदार

ओसामा बिन लादेन की हत्‍या के कारणों को जानने के लिए ऐबटाबाद जांच आयोग का गठन हुआ था, जिसकी रिपोर्ट में लादेन की हत्‍या के लिए प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी, सेना, आईएसआई, सरकार और अन्‍य सुरक्षा एजेंसियों का जिम्‍मेदार ठहराया गया था।

'द न्यूज' के मुताबित आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर गिलानी पाकिस्‍तानी सेना और आईएसआई की सलाह मानते और वीजा नहीं जारी करते तो अमेरिकी जासूस पाक में खुलेआम नहीं घूमते।

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