अरेंज मैरेज में ज्यादा, लव मैरेज में खुशियां कम

Hindu Wedding
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि बच्चों से परिवार में खुशिंयां छा जाती हैं। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। इंग्लैंड में किए गए शोध से पता चला है कि बच्चों से परिवार में खुशियां हो सकता है न आती हों, लेकिन इतना तय है कि बच्चे एक आदमी के जीने की वजह बन जाते हैं।

इंग्लैंड के प्राइम मिनिस्टर नेशनल हैपीनेस सर्वे के मुताबिक बच्चों के कारण पति -पत्नी को दुनिया में जिंदा रहने के लिए मजबूत आधार मिल जाता है। वरना कुछ वक्त बाद जिंदगी उसके लिए बोझ बनने लगती है। पहली बार व्यापक तौर पर किए गए सर्वे के मुताबिक यह भी साफ हो गया है कि विवाहित व्यक्ति ज्यादा खुश रहते हैं, लेकिन सबसे खराब जिंदगी उनकी होती है जो तलाक या अन्य कारणों से अपने पार्टनर से अलग हो जाते हैं।

प्राइम मिनिस्टर नेशनल हैपीनेस सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक हैरतअंगेज रुप से एक ऐसी सच्चाई आयी है जो आम तौर पर आम धारणा के खिलाफ है। रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड मे जो शादियां परिवार की मर्जी से हुई हैं वहां खुशियां ज्यादा थीं। जहां प्रेम विवाह हुए वहां खुशिय़ां कम थी। इसका मतलब साफ है कि इंग्लैंड में भी प्रेम विवाह की सफलता पर सवाल पैदा हो गए हैं।

प्राइम मिनिस्टर नेशनल हैपीनेस सर्वे टीम की प्रमुख पैट्रिक मोरगन कहती हैं हमने 80 हजार लोगों का सर्वे किया। उनसे चार सवाल पूछे गए। ये सवाल थे । आप अपनी जिंदगी से कितने खुश हैं। पहले आप कितना खुश थे। कल के लिए कितने चिंतिंत हैं। देखा गया कि खुशी की वजहों में बच्चो का स्थान सामान्य था। विवाहितों ने खुशी का पैमाना औसत तौर पर दस में 7.7 दिया। जबकि तलाक शुदा की जिंदगी में खुशियों की मात्रा 5.5 रही।

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